Tuesday, 22 January 2019

EVM हैकिंग की सच्चाई

क्या आपको लगता है कि ईवीएम मशीन को हैक किया जा सकता है?

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुनील अरोड़ा ने ईवीएम के मुद्दे पर स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ नहीं हो सकती। कई बार सियासी पार्टियां ईवीएम को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। यही नहीं चुनाव आयोग से कुछ विपक्षी दल 2019 का लोकसभा चुनाव ईवीएम के  बजाए बैलट पेपर से कराने की भी मांग कर चुके हैं।

तो आइये जानते हैं ईवीएम का भारत के चुनावो मे प्रयोग कब से हो रहा है और क्यूँ:

ईवीएम की सर्वप्रथम  टेस्टिंग 1982 के केरल के उत्तरी प्रवुर विधानसभा क्षेत्र मे कुछ पोलिंग स्टेशन के लिए प्रयोग किया गया था। उसके बाद प्रयोगात्मक 1989 तौर पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली के कुछ मतदान केन्द्रो पर ईवीएम का प्रयोग किया गया। 1999 मे गोवा मे विधानसभा की सभी सीटो  मे ईवीएम का प्रोयोग किया गया था। 2003 के राज्यो के तथा अन्य चुनावो मे ईवीएम का प्रयोग सफल रहा। 2004 का लोकसभा चुनाव पूर्णत: ईवीएम मशीन द्वारा ही सम्पन्न करवाया गया।

ईवीएम मशीन को प्राथमिकता देने के कई कारण रहे:

- मशीन से वोट की गिनती आसानी से जल्दी हो सकती थी।

- ईवीएम पेपर बेलेट के से सस्ती है  तथा इसकी लाइफ स्पैन 15 साल है।

- बेलट बॉक्स के मुक़ाबले मशीन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाना ले जाना आसान था ।

- बेलट बॉक्स  से ईवीएम ज्यादा बेहतर सिद्ध हुई क्यूंकी बेलट बॉक्स अक्सर रास्ते मे ही लूट लिए जाते थे ।

- कम पढ़े लिखे लोगों के लिए वोट देना आसान था । - बोगस वोटो पर रोक लगाई जा सकती थी।

अब 2019 मे जबकि लोगों में नई तकनीक  के प्रति जागरूकता आ गयी है अचानक से ईवीएम मशीन पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं और चुनावो को पहले की तरह बेलेट पेपर से करवाने की मांग की जा रही है। ये एक बहुत बड़ी साजिश भी हो सकती है अराजकता फैलाने के लिए।
अचानक से कुछ लोगों द्वारा विश्व स्तर से इस बात का एलान किया जा रहा है की 2014 मे बीजेपी द्वारा चुनाव ईवीएम मशीन को हैक करके जीता गया। क्या ऐसा हो सकता है? अगर ऐसा था तो तभी हैकिंग का मुद्दा क्यूँ नहीं उठाया गया। कौन हैं ये लोग जो लगभग 5 सालो बाद अचानक से ईवीएम हैकिंग का मुद्दा ले कर आए?  क्या बीजेपी 2014 मे इतनी ताकतवर थी कि ईवीएम हैक करवा सकती थी? और क्या बिना इंटरनेट/वाईफाई के हैकिंग का सिस्टम काम करता है। बोगस वोटिंग तो हो सकती है और होती भी थी, तो क्या ईवीएम द्वारा भी रिज़ल्ट से छेड़-छाड़ जा सकती है।
अब जबकि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा VVPAT (Voter Verified Paper Audit Trail) लागू करने के निर्देश दिये जा चुके हैं तो क्या ऐसे मे भी ईवीएम की उपयोगिता पर प्रश्न उठाए जा सकते हैं। ये कुछ प्रश्न है, जिनके बारे मे जनता को ही सोचना होगा और इस तरह के मुद्दो के प्रति सजग रहना होगा|

No comments:

Post a Comment