Thursday, 21 January 2016

क्या अनुवांशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलें किसी भी जीव के लिए हितकारी नहीं हैं?

एक तरफ तो सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कर रही है वहीं दूसरी तरफ जी एम बीजों के उपयोग को अनुमति देने जा रही है| शायद सरकार के सलाहकारों को जैविक खेती का मूल सिद्धांत ही नही मालूम कि इसमें केवल और केवल देशी बीज को ही बढ़ावा दिया जाता है। शायद जैविक खेती के नीति निर्धारक भी वातानुकूलित कमरों में बैठकर खेती करना-कराना चाह रहे है|
कहते हैं की आदमी ठोकर खाकर संभल जाता है पर हम तो गड्ढे में गिरकर भी समझने को तैयार नहीं हैं| बीटी कॉटन के रूप में जी एम बीजों के उपयोग करने का दुष्परिणाम हम देख ही चुके हैं|बीटी कॉटन के बाद से ही कपास में लगने वाले कीट अब ज्यादा शक्तिशाली हो चुके है| नई नई बीमारियां आ रही है| सफ़ेद मक्खी नई चुनौती बनी हुई है| बॉलवर्म के तो क्या कहने?
पुष्टि करनी हो तो महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा के कपास किसानों से मिल लीजिये| बीटी कॉटन से उत्पादित कपास भी स्वास्थ मानकों पर खरा नहीं उतर रहा| इसका निर्यात करना मुश्किल है| बीटी कॉटन के प्राप्त कपास्या खली जानवरों के लिए भी ठीक नहीं|
खबर है की सरकार जी एम सरसों के बीजों को अनुमति देने वाली है| कितने भी तर्क दिए जाएँ पर इसका भी हश्र बीटी कॉटन जैसा ही होगा, क्यूंकि तब भी कुछ ऐसे ही तर्क दिए गए थे| इस बार और २ कदम आगे बढ़कर कुछ नए तर्क रखे जा रहे हैं| यह की तेल में इसका कोई असर नहीं होगा, इसके अवशेष नहीं आएंगे,तो भैया यहाँ तो इसकी खली भी जानवरों को खिलाई जाती है तो उसका क्या? क्या उसमे भी कोई अवशेष नहीं होंगे? और हम तो माँ के हाथ का की सरसों की पत्ती का साग और मक्के की रोटी खाए बिना तृप्ति ही नहीं अनुभव करते तो उसका क्या ? तो अब ये मत कहना की की पत्ती में भी जी एम का कोई अवशेष नहीं होगा (वैसे हमारे लिए ही शायद जी.एम. मक्का भी आने की तैयारी में है...)|
जी एम बीज लाने का उदेश्य भारत के किसान की देशी बीजो के रूप में आत्मनिर्भरता को ख़त्म करना है| हमारी जैव विविधता को नष्ट करना है|सब कुछ चौपट करने के बाद किसान को सँभालने के लिए फिर कुछ हथकंडे अपनाये जायेंगे। जब तक कि जब तक किसान मजदूर न बन जाये| कोई आश्चर्य नहीं होगा जब कुछ समय बाद किसानों के सामूहिक आत्मदाह की खबर अगर आप पढ़ें तो (ख़ुशी की बात ये है की तब मुवावजा आपके परिवार को उसी दिन मिल जायेगा)

आम किसान विरोध करके नीतिगत फैसले में बदलाब करवाने में सक्षम तो है पर आवाज उठाई जाये तब किसान एकजुट होकर अपनी हैसियत औए दबदबे से दबाव बना सकते हैं| तो फिर आप भी जागरूक किसान बनिए। बस हमें अपने हिस्से का थोड़ा सा योगदान करना है परन्तु कैसे .. ??  यही करना है की जी एम बीज का उपयोग नहीं करना किसी को अपने पैर में कुल्हाड़ी मारते देखा है क्या... कहावतें ऐसे ही थोड़े ही बनी है.. अभी तक सुनते थे अब गुनने (करने) की बारी है...

अगर आपने यह लेख पढ़ा है तो और अगर आप किसान हैं तो आप जी एम बीजों का उपयोग नहीं करेंगे तथा आप इसके लिए दूसरे किसानों को भी जागरूक करेंगे यही अपेक्षा है.. आप किसान नहीं हैं तो किसान को जागरूक करिये, उचित माध्यम पर इस बात को उठाइये...

क्या क्या होती हैं हानि जीएम फसल से उत्पन्न अनाज से http://goo.gl/PtQsvs 

Source - Whats App

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