Tuesday, 12 January 2016

राष्ट्रीय युवा दिवस - स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस की शुभकामनायें


"उतिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत" उठो जागो और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो !!! -"स्वामी विवेकानन्द"

भारत में 'स्वामी विवेकानन्द' के जन्म दिवस को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।  
संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1985 ई.को अन्तर्राष्ट्रीय युवा वर्ष  घोषित किया गया।
भारत सरकार ने घोषणा की कि सन् 1985 से 12 जनवरी यानी 'स्वामी विवेकानन्द' जन्म दिन "राष्ट्रीय युवा दिवस" के रूप में देशभर में सर्वत्र मनाया जाए।
"उतिष्ठत-जाग्रत""उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए" का संदेश देने वाले युवाओं के प्रेरणास्रोत, समाज सुधारक युवा युग-पुरुष 'स्वामी विवेकानंद' का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) में हुआ।
स्वामी विवेकानंदजी आधुनिक भारत के एक महान चिंतक, महान देशभक्त, दार्शनिक, युवा संन्यासी, युवाओं के प्रेरणास्रोत और एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे। भारतीय नवजागरण का अग्रदूत यदि स्वामी विवेकानंद को कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। 
'विवेकानंद' दो शब्दों द्वारा बना है विवेक+आनंद, 'विवेक' संस्कृत मूल का शब्द है। 'विवेक' का अर्थ होता है 'बुद्धि' और 'आनंद' का शाब्दिक अर्थ होता है- खुशियां !!!
उनका जन्मदिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाए जाने का प्रमु्ख कारण उनका दर्शन, सिद्धांत, अलौकिक विचार और उनके आदर्श हैं, जिनका उन्होंने स्वयं पालन किया और भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी उन्हें स्थापित किया। उनके ये विचार और आदर्श युवाओं में नई शक्ति और ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। उनके लिए प्रेरणा का एक उत्तम स्रोत साबित हो सकते हैं।

स्वामी विवेकानंद के 10 अनमोल वचन-
कलकत्ता में 12 जनवरी 1863 को जन्मे स्वामी विवेकानंद की आज 153वीं जयंती है। युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने विवेकानंद ने दिए अनमोल विचार-

-उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये।
- उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो।
-ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है!
-जिस तरह से विभिन्न स्त्रोतों से उत्पन्न धाराएं अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है।
-किसी की निंदा ना करें। अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो जरूर बढ़ाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िए, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिए, और उन्हें उनके मार्ग पर जाने दीजिए।
-कभी मत सोचिए कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।
-अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।
-एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।
-उस व्यक्ति ने अमरत्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता।
- हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।
-जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।
-सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
- विश्व एक व्यायामशाला है, जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
- इस दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर के हैं, न कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है।
-हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा, और परमात्मा उसमे बसेंगे।


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