Sunday, 3 May 2015

कूर्म जयंती पर विशेष

 Image Courtesy - kamendu.wordpress.com

हिन्दू धार्मिक मान्यताओ के अनुसार भगवान  विष्णु ने समय समय पर धरती पर विभिन्न रूपों  में जन्म लिया। विष्णु जी के 10 अवतार माने जाते हैं।  इसी मान्यता के अनुसार विष्णु जी के दूसरे अवतार को कूर्म/कच्छप(कच्छुआ) के रूप में मन जाता है।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी का दिन कूर्म जयंती के रूप में मनाया जाता है।

भगवन विष्णु ने कूर्म अवतार क्यों लिया क्या आप जानते है?

हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार  क्षीरसागर के समुद्रमंथन के समय जब मंदर पर्वत डूबने लगा था तो भगवान विष्णु ने कूर्म का रूप धारण कर मंदर पर्वत को  अपने कवच पर संभाला था। इनकी पीठ का घेरा एक लाख योजन का था। कूर्म की पीठ पर मन्दराचल पर्वत स्थापित करने से ही समुद्र मंथन सम्भव हो सका था। इस प्रकार भगवान विष्णु, मंदर पर्वत और वासुकि नामक सर्प की सहायता से देवों एवं असुरों ने समुद्र मंथन करके चौदह रत्नों की प्राप्ति की।

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