Friday, 17 April 2015

Whats App की चर्चित पोस्ट - मंदिर में आरती के समय शंख क्यों बजाते हैं?

मंदिर में आरती के समय शंख बजते सभी ने सुना होगा परंतु शंख क्यों बजाते हैं? इसके पीछे क्या कारण है यह बहुत कम ही लोग जानते हैं. भारतीय संस्कृति में शंख को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. 

माना जाता है कि समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक शंख भी था. पुराणों और शास्त्रों में शंख ध्वनि को कल्याणकारी कहा गया है. इसकी ध्वनि विजय का मार्ग प्रशस्त करती है. 

शंख पूजाघर में न रखकर बाजू में तिपाई पर रखें. पूजा के समय शंख को अंदर-बाहर से पीले कपडे द्वारा पोंछकर साफ कर लें. उस पर गंध एवं फूल चढाएं. तुलसी पत्र भी रखें. शंख पर अक्षत न चढाएं. शंख को तिपायी पर रखते समय उसका मुंह अपनी ओर होना चाहिए. शंखनाद करने के बाद शंख का मुख स्वच्छ कर लेंना चाहिये.  

स्वास्थ्य सम्बन्धी लाभ  

1. - शंख बजाने का स्वास्थ्य लाभ यह है प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि वाणी संबंधी विकार भी शंखनाद के सतत अभ्यास से नष्ट हो जाते हैं, यदि कोई बोलने में असमर्थ है या उसे हकलेपन का दोष है तो शंख बजाने से ये दोष दूर होते हैं. 2. - शंख बजाने से कई तरह के फेफड़ों के रोग दूर होते हैं जैसे दमा, कास प्लीहा यकृत और इन्फ्लून्जा आदि रोगों में शंख ध्वनि फायदा पहुंचाती है. 3. - शंख के जल से शालीग्राम को स्नान कराएं और फिर उस जल को यदि गर्भवती स्त्री को पिलाया जाए तो पैदा होने वाला शिशु पूरी तरह स्वस्थ होता है. साथ ही बच्चा कभी मूक या हकला नहीं होता.यदि शंखों में भी विशेष शंख जिसे दक्षिणावर्ती शंख कहते हैं इस शंख में दूध भरकर शालीग्राम का अभिषेक करें. फिर इस दूध को नि:संतान महिला को पिलाएं. इससे उसे शीघ्र ही संतान का सुख मिलता है. परन्तु गर्भवती स्त्री को शंख नाद का अधिकार नहीं है. इसका कारण ये है कि -शंख फूँकते समय अवयवों पर तनाव आने से गर्भ पर विपरीत प्रभाव पडता है. इसके अलावा गर्भवती स्त्री को नजदीक से शंख की तेज आवाज भी नहीं सुननी चाहिए.  4. - शंखघोष से निकलने वाला ओम का महानाद मानसिक रोगों की निवृत्ति करता हुआ कुंडलिनी जागरण का सशक्त साधन बनता है. इसमें विशेष प्रकार के कुम्भक (प्राणायाम) की प्रक्रिया सन्नहित होती है, इसलिए यह शरीर के समूचे तंत्रिका तंत्र को उद्वेलित करता है. इसमें प्रसुप्त तंत्र जाग्रत होता है, शंखनाद से समूचे वातावरण की शुद्धि होती है. इसका स्पंदन शुभ और सतोगुणी क्रियाशक्ति का संचार करता है.  5.- शंख का महत्व धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, वैज्ञानिक रूप से भी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके प्रभाव से सूर्य की हानिकारक किरणें बाधक होती हैं. इसलिए सुबह और शाम शंखध्वनिकरने का विधान सार्थक है. इसकी ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक व्याप्त बीमारियों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं. 6. - इससे पर्यावरण शुद्ध हो जाता है. शंख में गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम जैसे उपयोगी पदार्थ मौजूद होते हैं. इससे इसमें मौजूद जल सुवासित और रोगाणु रहित हो जाता है. इसीलिए शास्त्रों में इसे महा औषधि माना जाता है.  शंख का पूजा मंत्र - 1. - शंख की पूजा इस मंत्र के साथ की जाती है-त्वं पुरा सागरोत्पन्न:विष्णुनाविघृत:करे देवैश्चपूजित: सर्वथैपाञ्चजन्यनमोऽस्तुते. 2. - या इस मंत्र का प्रयोग भी कर सकते है - शंखमध्ये स्थितं तोयं भ्रमितं विष्णोधरि. अङक्लग्नं मनुष्याणां महापापं व्यपाहति.


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