Thursday, 30 April 2015

जीवन के सत्य से जुड़ी whatsapp की चर्चित पोस्ट

एक इंसान घने जंगल में भागा जा रहा था। शाम का वक्त था। अंधेरे के कारण कुआं उसे दिखाई नहीं दिया और वह उसमें गिर गया। गिरते-गिरते कुएं पर झुके पेड़ की एक डाल उसके हाथ में आ गई। नीचे झांका, तो देखा की कुएं में चार अजगर मुंह खोले उसे देख रहे हैं। वह जिस डाल को पकड़े था, उसे दो चूहे कुतर रहे थे। इतने में एक हाथी कहीं से आया और पेड़ के तने को जोर-जोर से हिलाने लगा। वह घबरा गया और उसने सोचा कि हे भगवान अब मेरा क्या होगा।

उस पेड़ के ठीक ऊपर मधुमक्खियों का छत्ता था। हाथी के पेड़ को हिलाने से मधुमक्खियां उड़ने लगीं और शहद की बूंदें टपकने लगीं। एक बूंद शहद की लटकते हुए इंसान के होठों पर आ गिरी। उसने प्यास से सूख रही जीभ को होठों पर फेरा। शहद की उस बूंद में अद्भुत मिठास थी। कुछ पल के बाद फिर शहद की एक और बूंद उसके मुंह में टपकी। वह इतना मगन हो गया की अपनी मुश्किलों को भूल गया। उस जंगल से भगवान गुजर रहे थे। भगवान ने उसके निकट जा कर कहा, 'मैं तुम्हें बचाना चाहता हूं। मेरा हाथ पकड़ लो।' उस इंसान ने कहा कि भगवान एक बूंद शहद और चाट लूं, तो चलूं। एक बूंद, फिर एक बूंद। हर एक बूंद के बाद अगली बूंद का इंतजार। आखिर में थककर भगवान चले गए।

वह जिस जंगल में जा रहा था, वह जंगल है दुनिया और अंधेरा है अज्ञान। पेड़ की डाली है आयु। दिन रात रूपी चूहे उसे कुतर रहे हैं। घमंड का मदमस्त हाथी उस पेड़ को उखाड़ने में लगा हुआ है। शहद की बूंदें संसारिक सुख हैं जिनके कारण मनुष्य आसपास के खतरे को अनदेखा करता है। सुख की माया में खोए मन को खुद भगवान भी नहीं बचा

 For more social media news, please follow us on Twitter @newsexcuse
 

No comments:

Post a Comment