lलगता है मीडिया अब केजरीवाल को देवता दिखने की कोशिश कर रही है क्यूंकी उस ड्रामेबाज़ ने चंद अलफाज माफी के कह दिये।  मेरे कुछ सवाल हैं 
1. क्या गजेन्द्र सिर्फ किसान था? या AAP पार्टी का समर्थक?  क्या ये प्रूव हो गया कि ये खुदखुशी थी एक एक्सिडेंट नहीं।  हो सकता है ज्यादा जोश के कारण उसका पैर फिसल गया हो और गांठ कस गयी हो 
2. उसको अच्छी ख़ासी आम्दानी तो पगरी बांधने से थी तो उसको मरने कि क्या जरूरत थी।  और जो चिट उसके पास से मिली वो उसकी लिखाई है ही नहीं तो अपने उसकी माफी को इतना बल क्यूँ दिया 
3. क्या जब से जब से मौसम ने कहर मचाया है तो केवल सरकार को बदनाम करने के लिए गाँव मे होने वाली सब मौतों को किसान कि मौत बताकर उनका नंबर बढ़ा चढ़ा कर नहीं बताया जा रहा ? 
4. मुझे तो एक भी अखबार मे यह लिखा नहीं मिला कि सरकार का पैसा मोदी का पैसा है तो अगर किसान मुसीबत मे हैं तो उनकी सहायता भी नियमो के अनुसार ही होगी।  बाकी देश की जनता को भी तो कुछ करना/सोचना चाहिए।  
कृपया PRESS को इन बातों को भी ध्यान मे रखना चाहिए|
 


दूनिया में आज तक मानव सम्वेदनाओं से रहित इतना नीच व्यक्ति मैने नही देखा। धिक्कार है ऐसे व्यक्ति पर और उसको सपोर्ट करने वालों पर। जो इस व्यक्ति हो छोड़ कर आज अलग हो गये हैं वे भी इन्सान ही थे। झूठ, फरेव, ड्रामेबाज, मक्कारी जैसे अनेकों शब्द भी इस व्यक्ति के सामने छोटे पड़ जाते हैं।