Tuesday, 28 April 2015

क्यों आता है भूकंप और क्या हैं बचाव के उपाय?

नेपाल में आये भूकंप से जो तबाही हुई है उसके बाद हर जगह भूकंप की ही चर्चा हो रही है| सब अपनी तरह से भूकंप पर चर्चा कर रहे हैं| इसी लिहाज से हम आपको विस्तार से भूकंप के बारे में जानकारी दे रहे हैं| आपसे निवेदन है कि नीचे की पोस्ट को सभी से शेयर करें ताकि सबको सही जानकारी प्राप्त हो सके|

आपको जानकारी देने से पहले, NEWS EXCUSE आपसे निवेदन करता है कि नेपाल और भारत में मारे गए भाई-बहनों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें एवं अपने स्तर पर जो सहयोग आप कर सकते हैं वो अवश्य करें|

आइये, अब आपको विस्तार से भूकंप के बारे में बताते हैं|

क्यों आता है भूकंप ?
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हमारी धरती 4 परतों से बनी होती है| ये 4 परतें है - Inner Core, Outer Core, Mantle and Crust


Image Courtesy - http://www.english-online.at

Curst और Upper Mantle को Lithosphere कहते हैं| यह Lithosphere 30-50 किलोमीटर नीचे एक मोती परत के रूप में होती है| यह परत वर्गों में बंटी होती है, जिन्हें Tectonic Plates कहते हैं| 


Image Courtesy - www.earthquakenow.com

ये प्लेटें बहुत धीमी गति से घुमती रहती हैं| इसलिए हर साल ये प्लेटें लगभग 4-5 मिमी तक अपने स्थान से खिसक जाती हैं| इस प्रकार कोई प्लेट दूर हो जाती है और कोई पास आ जाती है| ऐसे में ये प्लेटें टकरा भी जाती हैं| इन प्लेटों के टकराने से उर्जा निकलती है जिसे भूकंप कहते हैं|

क्या होता है भूकंप का केंद्र ?

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Tectonic Plates के ठीक नीचे का वह स्थान जहाँ प्लेटों के टकराने से उर्जा निकलती है| इसी स्थान पर भूकंप का कम्पन सर्वाधिक होता है|
 

क्या होती है भूकंप की तीव्रता और नापने का पैमाना?
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जहाँ भूकंप का केंद्र होता है वहां कम्पन सबसे ज्यादा होता है| जैसे-जैसे कम्पन केंद्र से दूर फैलता जाता है वैसे-वैसे इसका प्रभाव कम होता जाता है| इसे ही भूकंप की तीव्रता कहते हैं|
भूकंप के तीव्रता की जांच रिक्टर स्केल से की जाती है| भूकंप के दौरान धरती के अन्दर से जो उर्जा निकलती है, उस तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है| रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप खतरनाक माना जाता है| रिक्टर स्केल पर 5 से कम तीव्रता वाले भूकम्पों को हल्का माना जाता है| हर साल लगभग 6000 ऐसे भूकंप आते हैं जिनकी तीव्रता 5 से कम होती है जबकि 2 या इससे कम तीव्रता वाले लगभग 8000 भूकंप प्रतिवर्ष आते हैं लेकिन कम तीव्रता की वजह से इनको रिकॉर्ड करना भी मुश्किल होता है|
भारत में हर महीने औसतन 20-25 भूकंप आते हैं जिनको हम महसूस कर सकते हैं| इन भूकम्पों के केंद्र विश्व में अलग-अलग स्थानों पर होते हैं|

भारत में भूकंप का खतरा -

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भूकंप के खतरे के हिसाब से भारत को 4 जोन में विभाजित किया गया है-
जोन 2 - दक्षिण भारतीय क्षेत्र - सबसे कम खतरा
जोन 3 - मध्य भारत - जोन 2 से थोडा ज्यादा खतरा
जोन 4 - दिल्ली समेत उत्तर भारत का तराई वाला क्षेत्र - अधिक खतरा
जोन 5 - हिमालय क्षेत्र, पूर्वोतर क्षेत्र और कच्छ का इलाका - सबसे ज्यादा खतरा


भूकंप से बचाव -

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अभी तक दुनिया के वैज्ञानिक भूकंप की भविष्यवाणी करने में सफल नहीं हुए हैं किन्तु यह बताया जा सकता है कि भूकंप के हिसाब से कौनसा क्षेत्र संवेदनशील है| इसलिए हम स्वयं भूकंप से बचाव के निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं-
1. नए घरों को भूकंपरोधी बनायें| भूकंपरोधी मकान बनाना महंगा नहीं होता सिर्फ इसकी तकनीक अलग है|
2. अगर आपका घर पुराना है तो रेट्रोफिटिंग के जरिये घर को भूकंपरोधी बना सकते हैं| इस तकनीक में दीवारों को पास में जोड़ा जाता है| यह तकनीक भी महंगी नहीं है|
3. टॉर्च, रेडियो, अतिरिक्त बैटरी, लम्बे समय तक चलने वाले खाद्य पदार्थ, पानी की बोतलें  एवं फर्स्ट एड किट आदि जैसे घर के सामान को घर में इस प्रकार रखें कि आपदा के वक़्त आप आसानी से निकाल सकें|
4. घर या ऑफिस के सामान फर्नीचर आदि को इस प्रकार से रखें कि आपदा के वक़्त आप आसानी से बाहर निकल सकें|


अचानक भूकंप आने की स्थिति में -

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1. अचानक भूकंप के झटके महसूस होने पर किसी मजबूत टेबल या फर्नीचर के नीचे घुटनों के बल बैठ जाएँ और फर्नीचर को कसकर पकड़ लें| जबतक झटके महसूस हों तबतक एक ही जगह बैठे रहें| जब आप सुनिश्चित कर लें कि झटके नहीं आ रहे तभी बाहर निकलें|
2. यदि घर में कोई मजबूत कवर या फर्नीचर न हो तो घर की मजबूत दीवार के पास घुटनों के बल बैठ जाएँ और अपने हाथ से जमीन पर संतुलन बनाये रखें|
3. दरवाज़े या बड़ी अलमारियों के पास खड़े न हों| यदि आप ऊँची इमारत में रहते हैं तो खिडकियों से दूर रहें|
4. यदि आप बिस्तर पर हैं तो वहीँ रहें और उसे कसकर पकड़ लें, साथ ही अपने सिर पर तकिया रख लें|
5. बाहर आने के लिए लिफ्ट का उपयोग बिलकुल न करें|
6. यदि आप बाहर हैं तो किसी खाली स्थान पर जाने की कोशिश करें| बिल्डिंग, पेड़ या बिजली के खम्बों से दूर रहें|
7. यदि आप कार चला रहे हैं तो कार धीमी करें और खाली स्थान पर ले जाकर खड़ी कर दें| तबतक कार में बैठे रहें जबतक झटके ख़त्म नहीं हो जाते|

और सबसे महत्वपूर्ण - यदि संभव हो तो मोबाइल, रेडियो या टीवी के माध्यम से मीडिया के संपर्क में रहें| अफवाहों पर बिलकुल ध्यान न दें|


 


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