Tuesday, 31 March 2015

ट्रेनों की लेटलतीफी से नाराज़ PM मोदी

ट्रेन अक्सर लेट हो जाया करती हैं। कभी कभी तो ट्रेन इतनी लेट होती हैं कि अगली आने वाली ट्रेन के टाइम पर आती हैं और लगातार जनता को इन समस्याओ का सामना करना पड़ता है।  जनता समय समय पर शिकायत भी करती है लेकिन अभी तक ट्रेन के देरी से आने पर कोई कंट्रोल सिस्टम नहीं बनाया गया। परंतु अब ऐसा लगता है कि जल्द ही इस समस्या से भी निजात पाई जा सकेगी।  ऐसा शायद इसलिए कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रेनों की लेटलतीफी के बारे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु से कुछ सवाल किए गए । प्रधानमंत्री जी ने पूछा कि समय से चलने वालीं ट्रेनों की संख्या लगातार घट क्यों रही है? 

प्रधानमंत्री को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्यूंकी पीएमओ को सांसदों, मंत्रियों और आम नागरिकों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ट्रेनें समय पर नहीं चलती हैं और इन शिकायतों को रेल मंत्रालय को बढ़ा दिया जाता है।शिकायतकर्ताओ ने ऐसे भी सवाल किए जिससे शायद रेलवे को नई दिशा मिल सके; मसलन आपातकाल के समय ट्रेनें समय पर कैसे चला करती थीं।

ट्रेनों की लेटलतीफी पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद रेलवे पुरानी फाइलों में इसका समाधान खोज रहा है। रेलवे के अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आपातकाल के दौरान कैसे ट्रेनें समय से चलती थीं। रेलवे के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'हमें बताया गया है कि आपातकाल के दौरान ट्रेनें समय से चलती थीं। हम पुरानी फाइलें निकालकर ट्रेनों के समय पर चलने के पैटर्न के बारे में स्टडी कर रहे हैं। पुराने रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि उस समय करीब 90% ट्रेनें समय से चल रही थीं।'

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु हर दिन का ब्योरा ले रहे हैं। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसा करने वाले वह पहले मंत्री हैं। इस महीने रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैफिक) अजय शुक्ला ने सभी जोनों को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी है कि आंकड़ों के बारे में गलत रिपोर्टिंग न की जाए। सेंट्रल कोचिंग ऑपरेशंस इन्फर्मेशन सिस्टम में मैनुअली गलत इन्फर्मेशन डालने पर ऐसा किया जा सकता है। एक तरह से इस चिट्ठी से यह साफ होता है कि अब तक आंकड़े गलत दिए जाते रहे हैं। लेटर में लिखा गया है कि ऐसा करने पर सस्पेंशन, इंटर जोनल ट्रांसफर और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी जाएगी। यह ऐक्शन जोनल चीफ पैसंजर ट्रैफिक ऑफिसर तक के अधिकारियों पर की जाने की बात कही गई है।

ट्रेनें वक्त पर चलें, यह देखने वाले ट्रैफिक निदेशालय ने कहा है कि उपकरण वगैरह खराब होने की वजह से कई बार देरी हो जाती है, मगर इंजिनियरिंग विभाग वाले इस तरह की घटनाओं को सही तरीके से रिपोर्ट नहीं करते। एक अधिकारी ने कहा, 'इतने सालों तक उपकरण वगैरह खराब होने से होने वाली देरी के डेटा को छिपाया जाता रहा है;  अब ऐसा नहीं हो सकेगा।'

कुछ साल पहले रेलवेज़ की सिग्नलिंग ऐंड टेलिकॉम ब्रांच ने 'डेटा लॉगर' नाम के सिस्टम का ट्रायल किया था। इससे रनिंग ट्रेन का स्टेटस ऑटोमैटिकली लॉग हो जाता है। यह ट्रायल सफल भी रहा था, मगर ट्रैफिक निदेशालय ने इसकी कीमत को लेकर चिंता जताई थी। इस वजह से इसे पूरे देश में लागू नहीं किया जा सका। अभी यह मुगलसराय जैसे चंद ही व्यस्त रूट्स पर लगा हुआ है।


लेकिन पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि इसी तरह का सिस्टम या और नई तकनीक का उपयोग कर इस समस्या का समाधान निकाला जा सकेगा । 

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