Thursday, 5 March 2015

कैसे लीक किए जाते हैं गोपनीय दस्तावेज़

क्या आप जानते हैं कि गोपनीय सरकारी सूचनाएं लीक करने का एक पूरा रैकेट है और हर तरह के दस्तावेज की अलग-अलग कीमतें हैं। दिल्ली का सुसंगठित सूचना नैटवर्क कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के मकसद से सरकार की गोपनीय सूचनाएं लीक करता है। यह नैटवर्क फाइव स्टार होटलों, कॉफी की दुकानों और फार्म हाऊसों से चलता है।

हर दस्तावेज की कीमत गोपनीयता के आधार पर तय होती है, गैर-वर्गीकृत पत्राचार से लेकर पी.एम.ओ. के दस्तावेज तक। प्रधानमंत्री कार्यालय के दस्तावेज की कीमत 2-5 लाख रुपए, रिपोर्ट, अनुमान, सर्वे, विभागीय बैठकों और मंत्री स्तर की बातचीत की जानकारियां 50,000-1 लाख रुपए, एक पेज की अधिसूचना या मीटिंग की रिपोर्ट 1000 रुपए। सूचना की जरूरत रणनीतिक जानकारियां, कारोबारी फैसलों की ताजा जानकारी के लिए नियोजकों द्वारा इस्तेमाल के लिए पड़ती है।

नियमित रूप से सूचनाएं मिलने से कंपनियों को प्रस्तावों का तेजी से अनुसरण करने में मदद मिलती है, खासकर किसी निजी कार्पोरेट घरानों से संबंधित प्रस्तावों के मामले में या प्रतिस्पर्धा से जुड़े मामलों में। कंपनी के अधिकारी अपने पक्ष में चीजों को बदलने की कोशिश करते हैं या हस्तक्षेप करने के लिए कंपनियों के उच्च स्तर के संपर्कों का इस्तेमाल करते हैं।

तीसरी व चौथी श्रेणी के कर्मचारी कागजात की हाथ से या इलैक्ट्रॉनिक तरीके से कॉपी करते हैं और 5000 रुपए से 2.5 लाख रुपए लेते हैं। सरकारी संपर्क टीमें कार्पोरेट घरानों में काम करती हैं। लॉबिंग करने वाले या कन्सल्टैंट कागजात चुराने और नीतिगत फैसलों की जानकारी हासिल करने के लिए संपर्कों का इस्तेमाल करते हैं, अपने ग्राहकों को फायदे पहुंचाते हैं। पत्रकार खबरों के लिए कागजात हासिल करते हैं। कुछ पत्रकार बेहतर सौदों के लिए उन्हें बेच देते हैं। नकद या दूसरे रूप में भुगतान लेते हैं जो सूचना की किस्म पर निर्भर करता है।

(पंजाब केसरी)


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