Friday, 20 March 2015

काला धन विधेयक और सजा

केंद्रीय बजट के दौरान कालेधन को वापस लाने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा की गई घोषणाओं को ठोस स्वरूप देने के लिए सरकार ने काला धन विरोधी कानून को मंजूरी दे दी है । विदेशी आय एवं अज्ञात संपत्ति (नए कर का अधिरोपण) विधेयक, 2015 लोकसभा में पेश किया जाएगा, जिसके तहत जो व्यक्ति विदेशी संपत्ति से संबंधित करों को बचाने की जुगत करेंगे, उन्हें 10 वर्षो की कठोर सजा होगी।

इसके प्रावधानों के तहत विदेशी आय व संपत्तियों को छिपाना समझौते के अयोग्य होगा और विवाद को सुलझाने के लिए उन्हें समझौता आयोग जाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही छिपाई गई आय या संपत्ति पर लगने वाले कर का 300 फीसदी की दर से उन्हें जुर्माना देना होगा।

नए कानून के मुताबिक, किसी भी अघोषित विदेशी संपत्ति या विदेशी संपत्ति से अघोषित आय पर कर अधिकतम सीमांत दर के हिसाब से लगेगा। लाभार्थी या विदेशी संपत्ति के लाभार्थी को रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य होगा, भले ही आय कर योग्य न हो।

इंडियन एक्सप्रेस मे पिछले माह एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2006-07 के दौरान एचएसबीसी बैंक की जेनेवा शाखा में 1,195 भारतीयों के खाते थे। रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार ने 350 विदेशी खातों का आकलन पूरा कर लिया है, जबकि 60 खाताधारकों के खिलाफ कर चोरी की कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी बीच, आयकर विभाग ने कर चोरी के गंभीर मामलों को दीवानी मामलों से आपराधिक मामलों की श्रेणी मे रखने का प्रस्ताव दिया है ।

वित्त मंत्री द्वारा दिये गए एक ब्यान मे कहा गया था, "साल 2014-15 के दौरान (दिसंबर 2014 तक) आयकर विभाग ने 414 समूहों में तलाशी ली थी और 582 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति को जब्त किया था।" इन तलाशियों के दौरान करदाताओं ने 6,769 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति को स्वीकारा था।

विधेयक के मुख्य बिंदू  हैं :

- विदेशी संपत्ति से संबंधित कर की चोरी करने वालों को अधिकतम 10 वर्ष की कठोर सजा
- छिपाई गई आय व संपत्ति पर 300 फीसदी की दर से जुर्माना
- किसी भी अघोषित विदेशी संपत्ति या विदेशी संपत्ति से अघोषित आय पर अधिकतम कर लागू होगा
- लाभार्थी या विदेशी संपत्ति के लाभार्थी को रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य होगा, भले ही कर योग्य आय न हो
- आयकर रिटर्न नहीं दाखिल करने या विदेशी संपत्ति की अपर्याप्त खुलासे का रिटर्न दाखिल करने पर सात साल की कठोर सजा का प्रावधान।


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