Friday, 13 March 2015

हवाला और काला धन

प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में दक्षिणी मुंबई के एक बैंक लॉकर से 83 लाख रुपये जब्त किये। जब्ती का यह मामला उन तीन मामलों में से एक है जिनकी जांच प्रवर्तन निदेशालय देश के बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके संदिग्ध हवाला टाइप ट्रांजैक्शंस को अंजाम देने की जांच कर रहा है। एजेंसी का मानना है कि अवैध रूप से जो हजारों करोड़ रुपये देश के बाहर भेजे गए वो या तो आयातित माल के पेशगी भुगतान के रूप में भेजे गए या बैंक को फर्जी आयात दस्तावेज जमा करके इसे भेजा गया। इसका नतीजा यह हुआ कि देश को विदेशी मुद्रा के भारी संकट का सामना करना पड़ा।

जिन तीन मामलों की जांच हो रही हैं, उनमें करीब 4,400 करोड़ रुपये पिछले 6 महीने में दुबई और हांगकांग जैसे व्यापारिक गढ़ में भेजे गए । एजेंसी को शक है कि भेजी गई वास्तविक रकम इस रकम से तीन गुना अधिक हो सकती है। एक सूत्र ने बताया कि आरोपियों ने बैंकिंग सिस्टम में कमी का फायदा उठाया और इस मामले से निपटने के लिए कोई ठोस कानून नहीं है। इसे जटिल हवाला जैसी गतिविधि बताते हुए उन्होंने कहा कि अवैध रूप से प्राप्त ज्यादातर पैसों को सामान्य बैंकिंग माध्यम से विदेश भेजा गया।

उन्होंने बताया कि फर्जी कंपनियों का पंजीकरण कराया गया औह अग्रणी बैंकों एवं सहकारी बैंकों में खाते खुलवाए गए। पहले सहकारी बैंकों में पैसे जमा किए और उसे बार-बार एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया गया ताकि इसके स्रोत का पता लगाना अत्यंत कठिन हो जाए। इस क्रम में पैसे को किसी बड़े बैंक में पहुंचने के बाद ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के माध्यम से आयात के लिए इसे अग्रिम भुगतान के रूप में दिखाया गया। साथ ही, फर्जी दस्तावेज भी पेश किए गए।

स्रोत का कहना है कि यह बात तो स्पष्ट है कि कुछ बैंक अधिकारियों की सांठगांठ के बगैर रैकेट इस कारनामे को अंजाम नहीं दे सकता है। उन्होंने कहा, 'उनकी (बैंक अधिकारियों की) संलिप्तता के बगैर इतने बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम नहीं दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि रैकेट में शामिल लोगों के विदेशी पार्टनर्स पैसे विदेशी मुद्रा में वापस निकाल लेते हैं। स्रोत ने बताया, 'इस तरह से हम किसी चीज का आयात किए बगैर डॉलर में भुगतान कर रहे हैं। यह भारते के लिए और यहां के बैंकों के लिए बहुत ही बड़ा नुकसान है।' उन्होंने बताया कि कुछ ट्रांजैक्शन होने के बाद रजिस्टर्ड कंपनियां गायब हो जाती हैं और फर्जीवाड़ा में लिप्त लोग फिर से नई फर्जी कंपनी बना लेते हैं।


(एनबीटी)

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