Friday, 27 February 2015

भूमि अधिग्रहण बिल के विभिन्न पहलू

मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर संसद से सड़क तक हंगामा है। विपक्षी जहां इसे किसान विरोधी बता रहे हैं, वहीं बीजेपी इसे किसान फ्रेंडली बताकर पेश कर रही है। जानिए बिल के पक्ष में बीजेपी की ओर से क्या-क्या तर्क दिए जा रहे हैं...

1- जून 2014 में 32 राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने विज्ञान भवन में मुलाकात कर बताया कि यूपीए सरकार द्वारा पारित भूमि अधिग्रहण अधिनियम के बाद विकास कार्य असंभव है। उन्होंने सरकार से इस पर पुनर्विचार करने और 5 साल बाद भूमि के मालिकाना हक खत्म होने, सहमति के बिंदुओं, सरकार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई, प्रभावित परिवार की परिभाषा आदि को संशोधित करने का आग्रह किया।

 2- 2011 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने जयराम रमेश को पत्र लिख कर अधिनियम का विरोध किया था। जो लोग अभी इसका विरोध कर रहे हैं उन्होंने तब महाराष्ट्र सरकार के इस कदम का विरोध नहीं किया था। 3-हाल ही में केरल सरकार ने भी यूपीए के भूमि अधिग्रहण कानून को बदलने की मांग की थी।

4- बिल को कमजोर नहीं किया गया है। वास्तव में 13 केंद्रीय अधिनियम, जिन्हें पहले शामिल नहीं किया गया था, उन्हें भी इसके दायरे में लाकर इसे और मजबूत किया गया है। पूर्व में जमीन के अधिग्रहण के लिए इन 13 अधिनियमों का सबसे अधिक प्रयोग किया गया, जिसके कारण किसानों को उचित सहायता और पुनर्वास नहीं मिल पाया।

5- किसानों को अपनी जमीन के बाजार मूल्य का चार गुना मिलेगा, साथ ही वे विकास के बाद विकास और अधिग्रहण लागत का भुगतान करके मूल भूमि का 20 फीसदी भी प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक किसान जिसके पास 10 एकड़ जमीन है और जिसकी कीमत बाजार में 2 लाख रुपये प्रति एकड़ है, उसे अपनी भूमि के लिए 80 लाख रुपये मिलेंगे। विकास कार्य के बाद उसके पास अविकसित भूमि की कीमत पर ही बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण 2 एकड़ जमीन खरीदने का विकल्प रहेगा।

6- अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान होगी तो कॉलेजों, अस्पतालों, रेलवे आदि सुविधाओं का विकास होगा। इससे किसानों को भी फायदा होगा।

7- निजी उद्देश्यों (होटल, बिल्डिंग बनाने, कारखाने) के लिए ली जाने वाली जमीन किसानों से उनके मनमाफ़िक मूल्यों पर सीधी खरीदनी पड़ेगी।

8- भूमि अधिग्रहण के लिए 70 फीसदी किसानों की सहमति को खत्म कर दिया गया है। एक ऐसे देश में जहां संसद 51% वोट के आधार पर निर्णय लेती है, वहां इतना हाई कैप रखना उन लोगों के लिए अनुचित है जो अपनी जमीन बेचना चाहते हैं।

9- सभी लोगों को आवास, अच्छा रोड नेटवर्क, अच्छी रेल कनेक्टिविटी आदि की जरूरतों के लिए संबंधित परियोजनाओं के लिए स्पेशल इम्पैक्ट असेसमेंट को हटा दिया गया है, लेकिन जमीन के मालिकों को सभी प्रकार की सहायता, पुनर्वास और मुआवजा दिया जाएगा।

10- सभी बड़ी परियोजनाओं को परियोजना पूरी होने की अवधि की आवश्यकता होती है। परमाणु ऊर्जा संयंत्र को पूरा करने के लिए 5 से अधिक साल लग सकते हैं। यदि यह पांच साल में पूरा नहीं हो सका तो क्या हमें इसका कार्य बीच में ही छोड़ देना चाहिए? इसीलिए 5 साल के भीतर परियोजना के पूरा नहीं होने के बावजूद जमीन खरीददार के पास ही रहने का प्रावधान किया गया है।

 Via NBT

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