Thursday, 4 December 2014

ग्लेशियर पिघल रहें हैं क्या है कारण ??

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के बासपा बेसिन में करीब नब्बे (90) ग्लेशियर हैं। वर्ष 1965 मे इन ग्लेशियरों का क्षेत्रफल 235 वर्ग किलोमीटर था, जो अब घटकर 177 वर्ग किलोमीटर रह गया है। जलवायु परिवर्तन, बर्फबारी व बारिश में कमी ग्लेशियर पिघलने का प्रमुख कारण हैं।


राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (आइएएच- Indian Association of Hydrologists) के विशेषज्ञों की माने तो बासपा बेसिन के ग्लेशियर का पिघलना अच्छा संकेत नहीं है । आइएएच की ओर से ग्लेशियर पिघलने के कारणों को जानने के लिए अध्ययन शुरू कर दिया गया है। एनआइएच के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय जैन ने बताया कि पुराने आंकड़ों व रिमोट सेंसिंग तकनीक से प्राप्त आंकड़े बता रहे हैं कि बासपा बेसिन के ग्लेशियर पचास सालों में करीब 24.6 फीसद पिघल चुके हैं। पिछले बीस सालों में तापमान में करीब एक डिग्री बढ़ोतरी भी ग्लेशियर पिघलने का कारण माना जा रहा है। आइएएच के अन्य प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रिनोज जे तय्यैन ने कहा क्यूंकी ग्लेशियर पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं, इनके तेजी से पिघलने से जल उपलब्धता पर असर पड़ सकता है और भविष्य में सिंचाई व पेयजल आदि के लिए संकट खड़ा हो सकता है।

बासपा बेसिन के आसपास के इलाके से अधिकतम तापमान के आंकड़े जुटाकर अध्ययन करने पर पाया गया कि अधिकतम तापमान प्रति साल 0.054 डिग्री की रफ्तार से बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त बासपा बेसिन के पास ही और 40 झीले भी बनी है। आइएएच विशेषज्ञों के अनुसार रिमोट सेसिंग तकनीक से इन झीलों की वर्तमान में वास्तविक स्थिति व संख्या का भी पता लगाया जा सकेगा।

वहीं, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा किए गए अध्ययन मे भी पाया गया है कि अंटार्कटिका में पिछले 21 सालों में सबसे तेजी से बर्फ पिघली है। इन पिघले हुए ग्लेशियर से निकले पानी का भार माउंट एवरेस्ट के बराबर है। नासा द्वारा किए गए अध्ययन मे कहा गया है विशाल ग्लेशियर पिघलकर एमुडसेन समुद्र में गिर रहे हैं।

ग्लेशियर का इस गति से पिघलना, मानव द्वारा किए जा रहे प्रकति विरुद्ध कार्यों की और संकेत करता है। अगर समय रहते ही प्रकृति की सुरक्षा के लिए सही कदम न उठाए गए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं जैसा कि हाल ही के वर्षो मे देखने को मिला - उतराखंड प्राकृत आपदा (बाढ़ का कहर) (2013) और जम्मू-कश्मीर मे इसी वर्ष (2014) आई बाढ़ ....। ये प्रकृति द्वारा मानव को सचेत करने के कुछ संकेत/चेतावनी समझे जा सकते हैं ।

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