Friday, 5 December 2014

कब तक होगा गरीब जनता का शोषण

पंजाब के गुरूदासपुर जिले में गैर सरकारी संगठन दवारा आयोजित निःशुल्क नेत्र शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 15 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। ये सभी लोग अमृतसर जिले के हैं। नेत्र ज्योति चले जाने के कुछ अन्य मामलों की भी खबरें मिल रही हैं लेकिन सही संख्या क्या होगी, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

इन प्रभावित मरीजों में ज्‍यादातर वृद्ध महिलाएं हैं जो अपनी ऑपरेशन की गई एक या दोनों आंखों की रोशनी खो बैठी हैं। इनके नवम्‍बर के पहले सप्‍ताह में मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए थे क्‍योंकि मोतिए के ऑपरेशन के बाद ठीक होने में कुछ समय लगता है इसलिए आंखों की पट्टियां खुल्ने के कुछ दिनों के बाद इनहे इसका आभास हुआ कि इनकी आंखों की रोशनी चली गई है। तब इन्‍होंने अमृतसर के डिप्‍टी कमिशनर से कार्रवाई करने के लिए मुलाकात की। इस समय जो डॉक्‍टर इन प्रभावित व्‍यक्तियों की देखभाल कर रहे हैं उनका यह मानना है कि बिना स्‍टैरलाइज किए इन यंत्रों से ऑपरेशन करना इस नाकामयाब ऑपरेशनों का कारण हो सकता है।


  • क्या डॉक्टर को नहीं पता कि ऑपरेशन करने वाले उपकरणो को बिना स्टरलाइज किए उपयोग नहीं क्या जाना चाहिए ?


  • डॉक्टर को ऑपरेशन करने का कितना अनुभव है इसकी भी जांच होनी चाहिए ?


इसी प्रकार की एक घटना पिछले माह यानि नवम्बर मे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के संकरी (पेंडारी), गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही में महिला नसबंदी शिविरों में महिलाओं की मौत और ऑपरेशन के बाद कई महिलाओं के बीमार होने से सामने आयी। शुरुआती जांच मे डॉक्टर को ही जिम्मेदार ठराया गया लेकिन जैसे जैसे जांच आगे बढ़ी तो दवाइयों मे चूहे मरने वाले कीटनाशक की भी पुष्टि हुई ।


  • मामले को गंभीरता को समझते हुए, निष्पक्षता और पारदर्शिता की दृष्टि से न्यायिक जांच के आदेश दिये जाते हैं लेकिन क्या सिर्फ जांच आयोग को इसका जिम्मा सौपने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ सकती है।

क्या ऐसे शिवरों के आयोजन से पहले आयोजककर्ता द्वारा सरकार से ली जाने वाली अनुमति के समय ही सभी प्रकार की जांच नहीं की जानी चाहिए?

  • अगर ऐसे मे किसी भी पक्ष की लापरवाही उजागर हो तो उसपर सख्त कार्यवाही नहीं की जानी चाहिए?


  • क्यूँ कोई कड़ा कानून नहीं बनाया जाता जिससे लापरवाही करने वाले सभी पक्षो की ज़िम्मेदारी निश्चित हो ?


  • ऐसे उपाय होने चाहिए जिससे प्रभावित लोगो को कम समय मे, सही से न्याय मिले?


गरीब जनता ही हमेशा ऐसे किए गए आयोजनो मे होने वाली लापरवाही का शिकार होती है इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान मे रखते हुए ज्यादा सावधानी की आवश्यकता है क्यूंकी किसी दुर्घटना की स्थिति मे उनके पास इलाज के लिए पैसा ही नहीं होगा । सरकार को भी ऐसे किए जाने वाले आयोजनो पर पहले से ही संज्ञान लेना चाहिए ताकि भविष्य मे ऐसी घटनाओ को रोका जा सके ।

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