Thursday, 11 December 2014

जन्मदिन / पुण्यतिथि

जन्मदिन


भारत के 13वें एवं वर्तमान राष्ट्रपति और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रमुख नेता प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के किरनाहर शहर के गांव मिराटी (मिराती) में 11 दिसंबर, 1935 में हुआ था। प्रणब मुखर्जी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1969 में की, जब वह पहली बार राज्य सभा से चुनकर संसद में आए थे। उसके बाद वे, 1975, 1981, 1993 और 1999 में राज्यसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए। प्रणब मुखर्जी सन 1974 में केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री बने। वर्ष 1984 में वह पहली बार भारत के वित्त मंत्री बने। वह 7 बार कैबिनेट मंत्री रहे। जिसमें 2 बार वाणिज्य मंत्री, 2 बार विदेश मंत्री और एक बार रक्षा मंत्री जैसे महत्त्वपूर्ण कैबिनेट पद शामिल हैं। 1984 मे दुनिया के शीर्ष पांच वित्तमंत्रियों की सूची में इन्हे स्थान मिला। 1997 मे ये सर्वश्रेष्ठ सांसद और 2008 मे पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित हुए।

अपने विवादास्पद नये धार्मिक (आध्यात्मिक) आन्दोलन के लिये मशहूर हुए और भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में रहे ओशो रजनीश का जन्म 11 दिसम्बर, 1931 को जबलपुर (मध्य प्रदेश) में हुआ था। उन्हें बचपन में 'रजनीश चन्द्र मोहन' के नाम से जाना जाता था। रजनीश की कई कृतियाँ चर्चित रहीं हैं, इनमें 'सम्भोग से समाधि तक', 'मृत्यु है द्वार अमृत का', संम्भावनाओं की आहट', 'प्रेमदर्शन' के नाम प्रमुख हैं। अपना निज़ी अध्यात्म गढ़कर उसका 'काम' के साथ समन्वय करके रजनीश ने एक अदभुत मायालोक की सृष्टि की ।


हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और राज्य सभा के पूर्व सदस्य दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर, 1922 मे पेशावर, पाकिस्तान मे हुआ था। दिलीप कुमार का वास्तविक नाम 'मोहम्मद युसुफ़ ख़ान' है। दिलीप कुमार को अपने दौर का बेहतरीन अभिनेता माना जाता है, त्रासद भूमिकाओं के लिए मशहूर होने के कारण उन्हे 'ट्रेजडी किंग' भी कहा जाता था। दिलीप कुमार को भारतीय फ़िल्मों में यादगार अभिनय करने के लिए फ़िल्मों का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार के अलावा पद्म भूषण और पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-इम्तियाज़' से सम्मानित किया गया है। अपने जीवनकाल में दिलीप कुमार कुल आठ बार फ़िल्म फेयर से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार पा चुके हैं और यह एक कीर्तिमान है जिसे अभी तक तोड़ा नहीं जा सका। अंतिम बार उन्हें सन् 1982 में फ़िल्म 'शक्ति' के लिए यह पुरस्कार दिया गया था, जबकि फ़िल्मफेयर ने ही उन्हें 1993 में राज कपूर की स्मृति में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया था । उनकी कुछ प्रसिद्ध फिल्मे हैं - दाग़ (1954), आज़ाद, देवदास (1955), नया दौर, मुग़ल-ए-आज़म, लीडर, राम और श्याम, शक्ति, सौदागर आदि।


भारत के प्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी, अंतर्राष्ट्रीय ग्रैंडमास्टर एवं विश्व चैंपियन रहे विश्वनाथन आनंद का जन्म 11 दिसम्बर 1969 मे मयीलाडूतुरै, तमिलनाडु मे हुआ । विश्वनाथन आनंद अब तक पाँच बार विश्व शतरंज चैंपियन बन चुके हैं। विश्वनाथन आनंद को पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण, अर्जुन पुरस्कार, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है ।



पुण्यतिथि


सुब्बुलक्ष्मी (मदुरै षण्मुखवडिवु सुब्बुलक्ष्मी अथवा एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी) का जन्म मंदिरों के शहर मदुरै, मद्रास (चेन्नई)में 16 सितम्बर 1916 को हुआ। उनका बचपन का नाम 'कुंजाम्मा' था। इन्हे कर्नाटक संगीत का पर्याय माना जाता है और भारत की वह ऐसी पहली गायिका थीं जिन्हें सर्वोच्च नागरिक अलंकरण भारत रत्न से सम्मानित किया गया इसके अतिरिक्त उन्हे पद्मविभूषण, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी सम्मान, रैमन मैग्सेसे सम्मान आदि से भी नवाजा गया । उनके गाये हुए गाने, ख़ासकर भजन आज भी लोगों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं। उनका गया ‘वैष्णव जन तो तेणे कहिए, जो पीर पराई जाने रे’आज भी काफी प्रसिद्ध है । देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें संगीत की रानी बताया तो वहीं स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने उन्हें 'तपस्विनी' कहा। श्रीमती सुब्बुलक्ष्मी पहली भारतीय थीं जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) की सभा में संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया, तथा पहली स्त्री थीं जिनको कर्णाटक संगीत का सर्वोत्तम पुरस्कार, संगीत कलानिधि प्राप्त हुआ।

11 दिसंबर, 2004 को 88 साल की उम्र में महान गायिका एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी ने दुनिया को अलविदा कह दिया ।


6 फ़रवरी, 1915 में मध्य प्रदेश में जन्मे प्रदीप का असल नाम रामचंद्र द्विवेदी था। किशोरावस्था में ही उन्हें लेखन और कविता का शौक़ था । प्रदीप हिंदी साहित्य जगत और हिंदी फ़िल्म जगत के एक अति सुदृढ़ रचनाकार रहे। कवि प्रदीप सरीखे देशभक्ति गीतों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 1962 के 'भारत-चीन युद्ध' के दौरान शहीद हुए सैनिकों की श्रद्धांजलि में 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गीत लिखा था। उनके द्वारा लिखे गए कुछ प्रमुख गीतो हैं - मेरे वतन के लोगो, आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ, दे दी हमें आज़ादी, हम लाये हैं तूफ़ान से, चल अकेला चल अकेला, चलो चलें माँ, आदि। फ़िल्मों में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें 1998 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी दिया गया। उनका हर फ़िल्मी-ग़ैर फ़िल्मी गीत अर्थपूर्ण होता था और जीवन को कोई न कोई दर्शन समझा जाता था।

11 दिसंबर 1998 को सबको अकेला छोड़ कवि प्रदीप अनंत यात्रा पर निकल गए।


विश्व में भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्कृष्टता के सबसे बड़े उदघोषकरवि और सितार वादक शंकर (पंडित रवीन्द्र शंकर चौधरी) का जन्म 7 अप्रैल, 1920 मे काशी मे हुआ। वे इस सदी के सबसे महान संगीतज्ञों में गिने जाते थे। रविशंकर को विदेशों में बहुत अधिक प्रसिद्धि प्राप्त हुई। विदेशों में वे अत्यन्त लोकप्रिय एवं सफल रहे। रविशंकर के संगीत में एक प्रकार की आध्यात्मिक शान्ति प्राप्त होती है। उन्हे विभिन्न सम्मान - भारतरत्‍न, पद्मविभूषण, पद्मभूषण, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया । 1986 में राज्यसभा के मानद सदस्य चुनकर भी उन्हें सम्मानित किया गया।

पंडित रविशंकर का 92 वर्ष की उम्र में 11 दिसम्बर 2012 को अमेरिका के एक अस्पताल मे सांस लेने में तकलीफ के कारण निधन हो गया।


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