Wednesday, 10 December 2014

जन्मदिन/ पुण्यतिथि

जन्मदिन


चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म 10 दिसंबर, 1878 को तमिलनाडु (मद्रास) के सेलम ज़िले के होसूर के पास 'धोरापल्ली' नामक गांव में हुआ था। राजगोपालाचारी वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक थे। वे स्वतन्त्र भारत के द्वितीय गवर्नर जनरल और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे। अपने अद्भुत और प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण 'राजाजी' के नाम से प्रसिद्ध महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, गांधीवादी राजनीतिज्ञ चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को आधुनिक भारत के इतिहास का 'चाणक्य' माना जाता है। 1954 में 'राजा जी' को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।

इस महापुरुष का 28 दिसम्बर, 1972 को निधन हो गया।


प्रसिद्ध इतिहासवेत्ता यदुनाथ सरकार का जन्म 10 दिसम्बर, 1870 ई. को राजशाही ज़िला, बांग्ला देश, के करछमरिया गांव में हुआ था। यदुनाथ अथवा जदुनाथ सरकार को एक प्रसिद्ध इतिहासकार के रूप में जाना जाता है। इन्होंने 1892 में अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. की परीक्षा पास की और जीवन का अधिकांश समय ग्रन्थों के अध्ययन और लेखन में व्यतीत किया। इतिहास और अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर के रूप में भी इन्होंने अपनी विशिष्ट सेवाएँ प्रदान की थीं। यदुनाथ सरकार ने मुग़ल और मराठा इतिहास पर कई ग्रन्थ लिखे, इन ग्रन्थों की प्रमाणिक सामग्री ने इन्हें ख्यातिप्राप्त इतिहासकार बना दिया। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं - इंडिया ऑफ़ औरंगज़ेब', 'हिस्ट्री ऑफ़ औरंगज़ेब', 'शिवाजी एंड हिज टाइम', 'नादिरशाह इन इंडिया', 'हाउस ऑफ़ शिवाजी' आदि।

भारतीय इतिहास से सम्बन्धित कई तथ्यों को उजागर करने वाले और इतिहासकारों में प्रसिद्धि प्राप्त यदुनाथ सरकार का 15 मई, 1958 को कलकत्ता में निधन हो गया।


मोहम्मद अली जौहर भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और शिक्षाविद थे। इन्होंने सन 1911 में 'कामरेड' नामक साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला था। तत्कालीन अंग्रेज़ सरकार द्वारा 1914 में इस पत्र पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया तथा मोहम्मद अली को चार साल की सज़ा दी गई। मोहम्मद अली ने सन 1913 में उर्दू का 'हमदर्द' नामक दैनिक पत्र भी शुरू किया। मोहम्मद अली ने 'खिलाफत आन्दोलन' में भी भाग लिया और 'जामिया मिलिया विश्वविद्यालय' की स्थापना की। ये रायपुर रियासत के शिक्षाधिकारी भी बनाये गए थे। मोहम्मद अली और मौलाना शौकत अली भारतीय राजनीति में 'अली बन्धुओं' के नाम से प्रसिद्ध थे।

सन 1930 में मोहम्मद अली लन्दन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन में उपस्थित हुए। जहाँ 4 जनवरी, 1931 में उनका देहान्त हो गया।

पुण्यतिथि


चौधरी दिगम्बर सिंह का जन्म 9 जून, 1913 में ग्राम कुरसण्डा तहसील सादाबाद ज़िला मथुरा (अब हाथरस ज़िला)मे हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी थे और चार बार लोकसभा सांसद रहे। इन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। किसानों की 'भूमि अधिग्रहण अधिनियम' में संशोधन का सबसे पहला प्रयास इनका ही था। किसानों की बात संसद में कहने के लिए दिगम्बर सिंह प्रसिद्ध थे। लगभग 25 वर्ष ये 'मथुरा ज़िला सहकारी बैंक' के अध्यक्ष रहे। मथुरा में 'आकाशवाणी' की स्थापना करवाने का श्रेय इन्हें ही जाता है।

10 दिसम्बर 1995 को मथुरा में इनका निधन हो गया ।


हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता, निर्माता-निर्देशक एवं युगपुरुष कुमुद कुमार गांगुली उर्फ अशोक कुमार का जन्म 13 अक्तूबर, 1911 मे बिहार मे हुआ । हिन्दी सिनेमा के अशोक कुमार को ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने उस समय प्रचलित थियेटर शैली को समाप्त कर अभिनय को स्वाभाविकता प्रदान की और छह दशकों तक अपने बेहतरीन काम से सिनेप्रेमियों को रोमांचित किया।[ अशोक कुमार को दादा साहब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार आदि पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया । अशोक कुमार ने 300 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय किया। इनकी कुछ प्रसिद्ध फिल्मे थी - अछूत कन्या, कानून, किस्मत, पाकीज़ा, बंदिनी, आशीर्वाद आदि। भारत के पहले सोप ओपेरा 'हम लोग' में उन्होंने सूत्रधार की भूमिका भी निभाई थी ।

क़रीब छह दशक तक बेमिसाल अभिनय से दर्शकों को रोमांचित करने वाले दादामुनी अशोक कुमार 10 दिसंबर 2001 को इस दुनिया को अलविदा कह गए।


राजनीतिज्ञ, राजनायिक और विद्वान के. एम. पणीक्कर (कावलम माधव पणिक्कर) का जन्म 3 जून, 1895 त्रावणकोर मे हुआ । 1925 में ये 'द हिंदुस्तान टाइम्स' के संपादक बने। इन्होंने पटियाला रियासत तथा बीकानेर रियासत के विदेशी मंत्री और बाद में मुख्यमंत्री (1944-47) के रूप में भी काम किया। भारत के स्वतंत्र होने के बाद उन्हें चीन (1948-52), मिस्र (1952-53) और फ़्रांस (1956-59) का राजदूत बनाया गया। वे मैसूर विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर आसीन रहे। 'एशिया ऐंड वेस्टर्न डॉमिनेन्स' नामक कृति मे एशिया पर यूरोपीय प्रभाव का वर्णन किया गया है । पणिक्कर ने मालाबार में पुर्तग़ालियों तथा डचों पर भी अध्ययन किया । 'टू चाइनाज़' (1955) मे साम्यवादी चीन से रूबरू करवाने का प्रयास किया । उन्होंने नाटक और उपन्यास भी लिखे हैं।


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