Wednesday, 3 December 2014

भोपाल गैस त्रासदी के 31 साल - कब मिलेगा इंसाफ

वारेन एंडरसन, यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन होने के नाते इस त्रासदी का मुख्य अभियुक्त था । लोगो ने एंडरसन की गिरफ्तारी की मांग के लिए धरना-प्रदर्शन किया जिसके चलते एंडरसन के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया।

इस घटना के चार दिन बाद यानि सात दिसंबर को सुबह साढ़े नौ बजे एंडरसन अपने अन्य सहयोगियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के विमान से भोपाल पहुंचा और जहां से उसे अपने हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिली। लेकिन एंडरसन को गिरफ्तार करने के बजाय राज्य सरकार के विशेष विमान से दोपहर साढ़े तीन बजे भोपाल से दिल्ली रवाना कर दिया गया जहां से वह अमेरिका लौट गया और कभी वापस नहीं आया । उससे कुछ जरूरी कागजात पर दस्तखत भी कराये गए थे ।

भोपाल में उसे दोषी ठहराने की लड़ाई जारी रही। एक दिसंबर 1987 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एंडरसन के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। नौ फरवरी 1989 को सीजेएम की अदालत ने एंडरसन के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया, मगर वह नहीं आया। आखिरकार एक फरवरी 1992 को अदालत ने एंडरसन को भगोड़ा घोषित कर दिया। एंडरसन के भोपाल न आने के बावजूद न्यायिक लड़ाई जारी रही। 27 मार्च 1992 को सीजेएम अदालत ने एंडरसन के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश दिए। साथ ही एंडरसन के प्रत्यार्पण के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी किए, मगर जून 2004 में यूएस स्टेट एंड जस्टिस डिपार्टमेंट ने एंडरसन के प्रत्यार्पण की भारत की मांग खारिज कर दी।

भोपाल की सीजेएम अदालत ने सात जून 2010 को सात भारतीय अधिकारियों को दो-दो वर्ष की सजा सुनाई और जमानत पर रिहा कर दिया। एंडरसन के प्रत्यार्पण को लेकर यूएस स्टेट एंड जस्टिस डिपार्टमेंट के निर्णय का मामला अभी भी सीजेएम अदालत में विचाराधीन है। इसी बीच 29 सितंबर, 2014 को फ्लोरिडा के एक नर्सिग होम में एंडरसन की मौत हो गई।

राज्य सरकार ने एंडरसन की रिहाई और दिल्ली के लिए विशेष विमान उपलब्ध कराने की जांच के लिए एक सदस्यीय कोचर आयोग का गठन वर्ष 2010 में किया था। इस आयोग के सामने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक स्वराज पुरी ने माना कि एंडरसन की गिरफ्तारी के लिए 'लिखित' आदेश दिया गया था, मगर रिहाई का आदेश 'मौखिक' था। यह आदेश वायरलेस सेट पर दिया गया था। अब तो कोचर आयोग की रिपोर्ट ही इस बात का खुलासा करेगी कि एंडरसन की रिहाई में किस-किस की भूमिका थी? तथ्यों से तो यही लगता है कि उसकी रिहाई में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की भूमिका व तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सहमति थी ।

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की सदस्य रचना ढींगरा का कहना है कि भारत सरकार एंडरसन का प्रत्यार्पण कराने में तो कामयाब नहीं रही, लेकिन अब यूनियन कार्बाइड के सचिव जॉन मैकडोनाल्ड का प्रत्यर्पण होना चाहिए। साथ ही अमेरिकी कंपनी डाओ केमिकल्स जब भोपाल गैस त्रासदी की जिम्मेदारी स्वीकार कर ले, तभी अमेरिका को भारत में पूंजीनिवेश की अनुमति दी जाना चाहिए।

भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार कहते हैं, "सरकारों की दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव में एंडरसन का प्रत्यपर्ण नहीं हो पाया। लोगो को अफसोस इस बात का है कि तीन दशकों में कितनी सरकारें आईं, मगर कोई सरकार यह भी पता नहीं लगा पाई कि वारेन एंडरसन की रिहाई किसके कहने पर हुई थी।

आज भी भोपाल की जनता को इंसाफ की दरकार है लेकिन इंसाफ कब और कैसे मिलेगा, कौन दोषी ठहराया जाएगा, ये अभी भी एक पहेली ही है।  अब शायद समय आ गया है कि हमारी न्याय व्यवस्था मे कुछ सुधार किए जाएँ ताकि मामलो को इतना निलंबित न किया जाये कि इंसाफ मांगने वाले लोग ही न रहे। 

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