Thursday, 20 November 2014

टीपू सुल्तान और फैज अहमद फैज --

जयंती

टीपू सुल्तान
टीपू सुल्तान का जन्म मैसूर के सुल्तान हैदर अली के घर 20 नवम्बर, 1750 को 'देवनहल्ली', वर्तमान में कर्नाटक का कोलार ज़िला में हुआ था। टीपू सुल्तान का पूरा नाम फ़तेह अली टीपू था। पिता की मृत्यु के बाद टीपू सुल्तान ने मैसूर सेना की कमान को संभाला। वह अपने पिता की ही भांति योग्य एवं पराक्रमी था। टीपू को अपनी वीरता के कारण ही 'शेर-ए-मैसूर' का ख़िताब अपने पिता से प्राप्त हुआ था। टीपू द्वारा कई युद्धों में हारने के बाद मराठों एवं निज़ाम ने अंग्रेज़ों से संधि कर ली थी। ऐसी स्थिति में टीपू ने भी अंग्रेज़ों से संधि का प्रस्ताव किया और चूंकि अंग्रेज़ों को भी टीपू की शक्ति का अहसास हो चुका था, इसलिए छिपे मन से वे भी संधि चाहते थे। दोनों पक्षों में वार्ता मार्च, 1784 में हुई और इसी के फलस्वरूप 'मंगलौर की संधि' सम्पन्न हुई।

कई बार अंग्रेज़ों के छक्के छुड़ा देने वाले टीपू सुल्तान को भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने विश्व का सबसे पहला रॉकेट अविष्कारक बताया था।

'फूट डालो, शासन करो' की नीति चलाने वाले अंग्रेज़ों ने संधि करने के बाद टीपू से गद्दारी की । ईस्ट इंडिया कंपनी ने हैदराबाद के साथ मिलकर चार बार टीपू पर ज़बर्दस्त हमला किया और आख़िरकार 4 मई सन् 1799 ई. को श्रीरंगपट्टनम मे टीपू सुल्तान की मृत्यु हो गयी ।

पुण्यतिथि

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का जन्म 13 फ़रवरी 1911 को अविभाजित हिदुस्‍तान के शहर सियालकोट (अब पाकिस्तान में है) मे हुआ । फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ एक प्रसिद्ध शायर थे जिनको अपनी क्रांतिकारी रचनाओं में रसिक भाव (इंक़लाबी और रूमानी) के मेल की वजह से जाना जाता है। सेना, जेल तथा निर्वासन में जीवन व्यतीत करने वाले फ़ैज़ ने कई नज़्म, ग़ज़ल लिखी तथा उर्दू शायरी में आधुनिक प्रगतिवादी दौर की रचनाओं को सबल किया। उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए भी मनोनीत किया गया था। जेल के दौरान लिखी गई उनकी कविता 'ज़िन्दा-नामा' को बहुत पसंद किया गया था। उनके द्वारा लिखी गई कुछ पंक्तियाँ अब भारत-पाकिस्तान की आम-भाषा का हिस्सा बन चुकी हैं, जैसे कि 'और भी ग़म हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवा'

इनकी मृत्यु 20 नवम्बर, 1984 मे पाकिस्तान मे हुई ।

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