Tuesday, 4 November 2014

अप्रासंगिक कानूनों के लिए मोदी सरकार की नीति

मोदी सरकार ने ऐसे कानून जिनका अब अस्तित्व ही नहीं है या जो समय की दौड़ मे अप्रासंगिक हो गए हैं उन कानूनों के विश्लेषण हेतु एक कमेटी का गठन किया है जो ऐसे कानूनों को जानकारी सरकार को देगी जो विधान की पुस्तिका मे तो अपनी पकड़ बनाए हुए हैं लेकिन वास्तव मे आज के समय मे उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। सरकार ऐसे अप्रासंगिक कानूनों को खत्म करना चाहती है ।

भारत की आजादी के 67 साल बाद भी देश की वैधानिक पुस्तिका में ब्रिटिश काल के कई कानून अस्तित्व में है। इस कानून में द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से हिस्सा लेने से लोगों को रोकने वाले व्यक्ति को दंड़ित करने का का भी एक प्रावधान है।

द्वितीय विश्व युद्ध से ठीक पहले बनाए गए आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 1938 में संघ के सशस्त्र बलों में नियुक्ति पाने से आम लोगों को रोकने या उन्हें इससे विरक्त करने का काम करने और इसके लिए उन्हें सार्वजनिक तौर पर संबोधित करने वालों को दंडित करने का प्रावधान है।यह कानून उन 73 पुराने और प्रचलन से हट चुके कानूनों में शामिल है, जिन्हें विधि आयोग ने समाप्त करने की सिफारिश की है। इन 73 कानूनों के साथ ही ऐसे कानूनों की कुल संख्या अब 258 हो गई है जिन्हें समाप्त किए जाने की सिफारिश की गई है। आयोग की रिपोर्ट संख्या 250 के अनुसार, यह कानून ब्रिटिश साम्राज्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए था और अब यह बेकार हो गया है। इसलिए केंद्र सरकार को इस कानून को समाप्त कर देना चाहिए। विधि आयोग ने सोमवार को ऐसे 73 और कानूनों को समाप्त करने की सिफारिश की जो पुराने पड़ चुके हैं ओैर प्रचलन मे नहीं हैं । आयोग ने सरकार को सौंपी तीन रिपोर्टो में ऐसे कुल 258 कानूनों को समाप्त करने की सिफारिश की है जो विधान की पुस्तिका में तो हैं, लेकिन अपनी प्रसांगिकता खो चुके हैं। इसमें हिन्दू उत्तराधिकार (अशक्तता के कारण वंचित करने से संबंधित) कानून 1928 एक अन्य कानून है जिसे समाप्त किये जाने की सिफारिश की गई है। इसमें कहा गया है कि हिन्दू उत्तराधिकार कानून के तहत आने वाले किसी भी व्यक्ति को बीमारी, शारीरिक या मानसिक अशक्तता के कारण संयुक्त परिवार की सम्पत्ति में हिस्सा देने या अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। लेकिन इस कानून का उद्देश्य अब हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 28 में समाहित कर दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को बीमारी या अशक्तता के आधार पर सम्पत्ति के उत्तराधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।

इसके अलावा भी मोदी सरकार, ऐसे अन्य कई कानून जिनकी कोई मान्यता नहीं है या जिनमे बदलाव की जरूरत है उसको समयानुरूप सुधारने/समाप्त करने पर भी विचार कर रही है

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