Thursday, 27 November 2014

कोलकाता का लैंडमार्क स्टैचू 'गायब'

कोलकाता में सार्वजनिक कला के सबसे बड़े प्रतीक में से एक रहा 30 फीट ऊंचा परोमा स्टैचू अचानक गायब हो गया है। पिछले 27 सालों से ईस्टर्न मेट्रोपोलिटन बाइपास पर स्थित परोमा स्टैचू नामक यह लैंडमार्क शायद सोमवार रात गायब हुआ। अब वहां सिर्फ मलबे का एक ढेर ही बचा है।

सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने इस स्टैचू को हटाने और उसकी जगह एक बड़ा ग्लोब बनाए जाने का आदेश दिया था। राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हाकिम के अनुसार यह एक बहुत पुराना स्टैचू है।

परोमा स्टैचू के चारो तरफ से ट्रैफिक गुजरता था, इसलिए इसे परोमा आइलैंड कहा जाता था। इसे 1987 में कलाकार शानू लाहिड़ी ने बनाया था, जिनका पिछले साल निधन हो गया था। शानू की बेटी इस घटना से स्तब्ध हैं। शानू की बेटी दमयंती लाहिड़ी ने कहा, 'यह अपमानजनक है, हम सोच भी नहीं सकते। हम पिछले साल 30 सालों से इसे वहां देख रहे हैं और अब यह अचानक गायब हो गया है। किसी को इसके बारे में कुछ पता नहीं है।' उन्होंने कहा, 'मुझे इसे हटाए जाने के बारे में सूचित नहीं किया गया है। परिवार को भूल जाइए क्या नागरिकों को भी इस बारे में जानने का अधिकार नहीं है?'

इस स्टैचू के संरक्षक कोलकाता मेट्रोपोलिटन डिवेलपमेंट अथॉरिटी ने बार-बार पूछे जाने पर भी इस मामले मे कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।

फेमस सिंगर ऊषा उत्थुप ने कहा, 'कोलकातावासी जानना चाहते हैं कि शानूदी का स्टैचू कहां गया? आप मुझे बताइए, मैं बहुत दुखी हूं। इसमें मेरा कोई पॉलिटिकल अजेंडा नहीं है लेकिन यह मैं इसलिए जानना चाहती हूं क्योंकि मैं एक नागरिका हूं।' उत्थुप ने कहा, 'शानूदी एक महान आर्टिस्ट थीं और आप उनके स्टैचू को इस तरह नहीं हटा सकते।

लेखक अमित चौधरी भी सरकार के कदमों से आंतकित हैं। अमित कहते हैं कि बिना बताए स्टैचू को हटाया जाना या सरकार की पूरे शहर को नीलो और सफेद रंग में रंगने की नीति 'दमनकारी' है। शानू की बेटी दमयंती ने कहा, 'मैं खुश हूं कि मां यहां नहीं हैं।' (nbt)

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