Wednesday, 26 November 2014

जन्मदिन

वर्गीज़ कुरियन (जन्म: 26 नवंबर, 1921 - मृत्यु: 9 सितम्बर, 2012) "अमूल मैन" नाम से विख्यात, भारत में दुग्ध क्रान्ति (श्वेत क्रान्ति) के जनक माने जाते हैं। भारत को दुनिया का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए श्वेत क्रांति लाने वाले वर्गीज़ कुरियन को देश में सहकारी दुग्ध उद्योग के मॉडल की आधारशिला रखने का श्रेय जाता है।

राम शरण शर्मा (जन्म- 26 नवम्बर, 1919, बेगुसराय, बिहार; मृत्यु- 20 अगस्त, 2011, पटना) भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार और शिक्षाविद थे। वे समाज को हकीकत से रु-ब-रु कराने वाले, अन्तराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त भारतीय इतिहासकारों में से एक थे। रामशरण शर्मा 'भारतीय इतिहास' को वंशवादी कथाओं से मुक्त कर सामाजिक और आर्थिक इतिहास लेखन की प्रक्रिया की शुरुआत करने वालों में गिने जाते थे। वर्ष 1970 के दशक में 'दिल्ली विश्वविद्यालय' के इतिहास विभाग के डीन के रूप में प्रोफेसर आर. एस. शर्मा के कार्यकाल के दौरान विभाग का व्यापक विस्तार किया गया था। विभाग में अधिकांश पदों की रचना का श्रेय भी प्रोफेसर शर्मा के प्रयासों को ही दिया जाता है।

नाथूराम प्रेमी (जन्म- 26 नवम्बर, 1881, मध्य प्रदेश; मृत्यु- 30 जनवरी, 1960, महाराष्ट्र) प्रसिद्ध लेखक, कवि, भाषाविद और सम्पादक थे। वे अपनी रचनाएँ 'प्रेमी' उपनाम से लिखते थे। नाथूराम जी ने संस्कृत, बंगला, मराठी और गुजराती भाषाओं का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने मौलिक ग्रंथों के प्रकाशन के साथ-साथ भारतीय भाषाओं, विशेषत: बंगला के मूर्धन्य साहित्यकारों की रचनाओं के अनुवाद प्रकाशित करके हिन्दी के भंडार को भरने का सराहनीय कार्य सम्पन्न किया था।

वी. के. मूर्ति (जन्म: 26 नवम्बर, 1923 - मृत्यु: 7 अप्रॅल, 2014) भारतीय सिने जगत में एक जाना-पहचाना नाम है। वे हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफ़र हैं। एक कैमरामैन के रूप में वी. के. मूर्ति ने बहुत नाम कमाया है। वे ऐक्टर-डायरेक्टर गुरुदत्त की टीम के साथ जुड़े थे। 'प्यासा', 'काग़ज़ के फूल', 'चौंदहवीं का चांद' और 'साहब बीबी और गुलाम' जैसी गुरुदत्त की ब्लैक ऐंड वाइट फ़िल्मों में उन्होंने लाइट और कैमरे से चमत्कार उत्पन्न करके दर्शकों का मन मोह लिया था। उन्हें देश के सबसे बड़े सम्मान 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' (2008) के लिए भी चुना गया।

रवि राय (जन्म: 26 नवंबर, 1926) एक राजनीतिज्ञ और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष हैं। नौवीं लोकसभा के चुनावों ने भारत के संसदीय लोकतंत्र में एक नए युग का सूत्रपात किया। कोई भी एक राजनीतिक दल सदन में पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं कर सका और इस प्रकार भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार, "त्रिशंकु संसद" बनी। इस अभूतपूर्व राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद, लोक सभा के सदस्यों ने दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर श्री रवि राय को सर्वसम्मति से नौवीं लोक सभा का अध्यक्ष बनाया। अंतर्निहित सादगी तथा पारदर्शी निष्कपटता से संपन्न रवि राय ने अपने निष्पक्ष तथा विवेकपूर्ण रवैये से अध्यक्ष पद के सम्मान तथा गरिमा में वृद्धि की।

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