Tuesday, 11 November 2014

इन प्रतिभाओ का जन्मदिन है आज



मौलाना अबुलकलाम आज़ाद का जन्म 11 नवम्बर, 1888 को हुआ। वे एक मुस्लिम विद्वान थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। वह वरिष्ठ राजनीतिक नेता थे। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता का समर्थन किया और सांप्रदायिकता पर आधारित देश के विभाजन का विरोध किया। स्वतंत्र भारत में वह भारत सरकार के पहले शिक्षा मंत्री थे। उन्हें 'मौलाना आज़ाद' के नाम से जाना जाता है। 'आज़ाद' उनका उपनाम है।

स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री बनने पर उन्होंने नि:शुल्क शिक्षा, भारतीय शिक्षा पद्धति, उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना में अत्यधिक कार्य किया। मौलाना आज़ाद को ही 'भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान' अर्थात 'आई.आई.टी. और 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग' की स्थापना का श्रेय है। इसके अतिरिक भी अन्य उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना उनके द्वारा की गयी जिनमे हैं - संगीत नाटक अकादमी (1953),साहित्य अकादमी (1954), ललित कला अकादमी (1954), 1950 से पहले 'भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद', 1955 में स्कूल ऑफ प्लानिंग और वास्तुकला विद्यालय, 1956 में 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग' (यूजीसी), 1951 में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, खड़गपुर की स्थापना की गई और इसके बाद शृंखलाबध्द रूप में मुम्बई, चेन्नई, कानपुर और दिल्ली में आई.आई.टी. की स्थापना की गई।

22 फ़रवरी सन् 1958 को हमारे राष्ट्रीय नेता का निधन हो गया। वर्ष 1992 में मरणोपरान्त मौलाना को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

जे. बी. कृपलानी (जीवतराम भगवानदास कृपलानी)का जन्म 11 नवम्बर, 1888 को हैदराबाद (सिंध) में हुआ था। वे क्षत्रिय परिवार से सम्बन्ध रखते थे। भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रतासेनानी और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने एक शिक्षक के रूप में अपना व्यावसायिक जीवन प्रारम्भ किया था। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी से उनका निकट सम्पर्क था। वे 'गुजरात विद्यापीठ' के प्राचार्य भी रहे थे, तभी से उन्हें 'आचार्य कृपलानी' पुकारा जाने लगा था। हरिजन उद्धार के लिए कृपलानी जी निरंतर गाँधीजी के सहयोगी रहे। वे 'अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' के महामंत्री तथा वर्ष 1946 की मेरठ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे। उनकी पत्नी सुचेता कृपलानी भी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही थीं।

देश की आज़ादी में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले आचार्य कृपलानी जी का 19 मार्च, 1982 में निधन हुआ।

माला सिन्हा का जन्म 11 नवम्बर, 1936 मे नेपाल मे हुआ। बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री माला सिन्हा ने फ़िल्मों में लंबा सफर तय किया और अपनी अलग पहचान बनाई। वे बांग्ला फ़िल्मों से हिंदी फ़िल्मों में आई थीं। 'बादशाह' से हिंदी फ़िल्मों में प्रवेश करने वाली माला सिन्हा ने एक सौ से कुछ ज्यादा फ़िल्में कीं।

माला सिन्हा की पहली फ़िल्म 1954 में आई थी और 1985 तक वह लगातार काम करती रहीं। 1985 में “दिल तुझको दिया” निपटाने के बाद उन्होंने फ़िल्मों से छुट्टी ले ली। लेकिन 1991 में राकेश रोशन की फिल्म “खेल” और दो अन्य फ़िल्में “राधा का संगम” (1992) और “जिद” (1994) के बाद इनहोने फ़िल्मों को अलविदा कह दिया।

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