Thursday, 20 November 2014

भारत का आदर्श गाँव

अहमदाबाद से 100 किलोमीटर दूर पनसारी गांव देश के लिए मिसाल की तरह है। गांव में क्लोज सर्किट कैमरा, वॉटर प्यूरिफाइंग प्लांट्स, एयर कंडिशन्ड स्कूल, वाई-फाई इंटरनेट से लेकर बायोमेट्रिक मशीन तक जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं। इस गांव का कायापलट महज 8 सालों में हुआ है। गांव की तकदीर महज 16 करोड़ रुपए में बदली। गांव की तस्वीर बदलने के पीछे 31 साल के सरपंच हिमांशु पटेल हैं। पटेल उत्तर गुजरात यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट हैं। 2006 के पंचायत चुनाव में 23 साल की उम्र में हिमांशु को जीत मिली थी।

एक वह तस्वीर थी जब गांव पूरी तरह से हाशिए पर था। यहां बुनियादी सुविधाएं सड़क और बिजली तक नहीं थीं। पंचायत में फंड की कमी थी। पटेल ने जब कमान संभाली तो फंड का सही इस्तेमाल करना शुरू किया। इसके बाद फंड की कमी भी दूर हो गई।

पिछले आठ सालों में हिमांशु पटेल ने प्रशासन के साथ बड़ी सक्रियता से काम किया। इसमें पटेल ने जिला प्रशासन जो कि फंड जारी करता है के साथ बढ़िया समन्वय कायम किया। डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग कमिशन, बैकवर्ड रिजनल ग्रांट फंड, 12वें फाइनैंश कमिशन के साथ पटेल ने गांव के लिए जमकर काम किया। इसके साथ ही गांव के विकास की कहानी शुरू हुई। जाहिर है ऐसे में भला रिजल्ट आने से कौन रोकता। हाल ही में ग्रामीण और शहरी विकास मंत्रालय की टीम पनसारी में पहुंची थी। इस टीम ने विकास के पनसारी मॉडल की स्टडी की।

अब युवा सरपंच अगले प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे हैं। वह गांव में ही प्लास्टिक के कूड़े से बिजली बनाने की यूनिट पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वह गंदगी उठाने के लिए ई-रिक्शा लगाना चाहते हैं। हिमांशु ने कहा कि इसके लिए राज्य सरकार से हमें 52 लाख की रकम पहले ही मिल चुकी है। पटेल ने कहा कि विकास में शिक्षा की अहम भूमिका है। इसलिए हमने गांव में शिक्षा की स्थिति को सुधारने की कोशिश की। 2006 में स्कूल में 300 स्टूडेंट्स थे। अब स्टूडेंट्स की संख्या बढ़कर 600 हो गई है। हिमांशु ने कहा कि गांव के स्कूल न केवल एयर कंडिशन्ड है बल्कि कंप्यूटर्स और प्रॉजेक्टर्स भी हैं।

गांव के स्कूल में टीचर नरेंद्र झाला ने कहा कि हम ज्यादा बच्चों को स्कूल तक लाने में लगे हैं। 7वीं क्लास की स्टूडेंट विद्या पटेल ने कहा कि हमें यहां पढ़ाई करने में मजा आ रहा है। ऑडियो, विजुअल प्रेजेंटेशन से पाठ याद करने में काफी सुविधा होती है। सबसे अचरज की बात यह है कि पटेल ने कभी भी विधायक से फंड की मांग नहीं की। इन आठ सालों में सांसद निधि से भी गांव को महज एक लाख का फंड मिला। हिमांशु पटेल ने कहा कि हमें इन फंडों की जरूरत महसूस नहीं होती है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में काफी फंड आवंटित हैं। बस इन्हें ठीक से इस्तेमाल करने की जरूरत हैं। यदि आप ठीक इस्तेमाल कर लेते हैं तो चौंकाने वाला परिवर्तन हो सकता है।

(एनबीटी)

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