Wednesday, 12 November 2014

आज है इन विशेष प्रतिभाओ को याद करने का दिन

आज है बर्डमैन सालिम अली का जन्मदिन

सालिम मोइज़ुद्दीन अब्दुल अली का जन्म 12 नवम्बर 1896 को बॉम्बे (अब मुम्बई)में एक सुलेमानी बोहरा मुस्लिम परिवार में हुआ। सालिम अली एक भारतीय पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिवादी थे। सालिम अली को भारत के बर्डमैन के रूप में जाना जाता है। सलीम अली भारत के ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारत भर में व्यवस्थित रूप से पक्षी सर्वेक्षण का आयोजन किया और पक्षियों पर लिखी उनकी किताबें 'द बुक ऑफ़ इंडियन बर्ड्स', 'हैण्डबुक ऑफ़ द बर्ड्स ऑफ़ इंडिया एण्ड पाकिस्तान' 'द फाल ऑफ़ ए स्पैरो'ने भारत में पक्षी-विज्ञान के विकास में काफ़ी मदद की है। पक्षियों के सर्वेक्षण में 65 साल गुजार देने वाले इस शख़्स को परिंदों का चलता फिरता विश्वकोष कहा जाता था। बिना कष्ट पहुंचाए चिडि़यों को पकड़ने की प्रसिद्ध 'गोंग एंड फायर' व 'डेक्कन विधि' सालिम अली की ही खोज है जिन्हें आज भी पक्षी जगत में प्रयोग किया जाता है। भारत सरकार की ओर से 1958 में पद्म भूषण व 1976 में पद्म विभूषण से नवाजे इस 'परिंदों के मसीहा' के प्रकृति संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

राष्ट्रीय पक्षी दिवस: प्रत्येक वर्ष '12 नवम्बर' को अर्थात पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सालीम अली के जन्म दिवस भारत सरकार ने राष्ट्रीय पक्षी दिवस घोषित किया हुआ है।

27 जुलाई 1987 को 91 साल की उम्र में डॉ. सालिम अली का निधन हुआ। सालिम अली के नाम पर भारत में 'बॉम्बे नैचुरल हिस्ट्री सोसाइटी' और 'पर्यावरण एवं वन मंत्रालय' द्वारा कोयम्बटूर के निकट 'अनाइकट्टी' नामक स्थान पर सालिम अली पक्षीविज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केन्द्र स्थापित किया गया।


आज है पंडित मदनमोहन मालवीय की पुण्यतिथि 


मदनमोहन मालवीय का जन्म 25 दिसम्बर, 1861 को इलाहाबाद मे हुआ । चूँकि ये लोग मालवा के मूल निवासी थे, इसीलिए मालवीय कहलाए। ये एक महान स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि एक बड़े समाज सुधारक भी थे। वे तीन बार हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने गये। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 1915 ई. में 'काशी हिन्दू विश्वविद्यालय' की स्थापना है। हिन्दू राष्ट्रवाद के समर्थक मदन मोहन मालवीय देश से जातिगत बेड़ियों को तोड़ना चाहते थे। उन्होंने दलितों के मन्दिरों में प्रवेश निषेध की बुराई के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलन चलाया। मालवीय जी ने 'सत्यमेव जयते' के नारे को जन-जन में लोकप्रिय बनाया। मदन मोहन मालवीय अपने महान कार्यों के चलते 'महामना' कहलाये।

मालवीय जी आजीवन देश सेवा में लगे रहे और 12 नवम्बर, 1946 ई. को इलाहाबाद में उनका निधन हो गया।

No comments:

Post a Comment