Tuesday, 14 October 2014

एक्सपायर सर्टिफिकेट के साथ उड़ान भर रहे है जेट एयरलाइन्स पायलट

जेट एयरवेज के लाइसेंसिंग डिपार्टमेंट को हाल में पता चला है कि उसके कुछ पायलट एक्सपायर हो चुके एनुअल लाइन चेक सर्टिफिकेट के साथ उड़ान भर रहे हैं। इसका पता तब चला, जब 3 पायलटों ने लाइसेंस रिन्यूअल के लिए डॉक्यूमेंट्स जमा किए। यह सेफ्टी का मुद्दा तो है ही, इससे यह आशंका भी पैदा हुई है कि एयरलाइंस में और भी पालयट ऐसे लाइसेंस के साथ उड़ान भर रहे होंगे।'

लाइन चेक सर्टिफिकेशन के दौरान पायलट के साथ कॉकपिट में बैठा ट्रेनर फ्लाइट पर नजर रखता है। लाइन चेक से यह पक्का होता है कि सभी नॉर्म्स फॉलो किए गए हैं। फ्लाइट के दौरान पायलट से उम्मीद की जाती है कि वह असामान्य परिस्थितियों में सबसे अच्छा फैसला करेगा और उसे ट्रेनर्स के सामने साबित करना होता है कि वह कितनी अच्छी उड़ान भर सकता है। इसमें पायलट की तरफ से हुई कोई भी चूक उसकी नाकामयाबी मानी जाएगी और पायलट को दोबारा ट्रेनिंग के लिए भेज दिया जाएगा।

जेट के जिन 3 पायलटों के एनुअल लाइन चेक एक्सपायर हुए हैं, उनमें से 2 ने लाइन चेक फ्लाइट्स ऐसे पायलटों के साथ की थी, जो ट्रेनर्स नहीं थे। तीसरे का रिन्यूअल गलत डेट की वजह से ड्यू था, जो लाइन चेक नियमों के खिलाफ है। एनालिस्ट्स को लगता है कि इस मामले में ऑपरेशनल मैनेजमेंट से चूक हुई है और इससे कई तरह के सवाल उठते हैं।

जानकारों का मानना है कि यह चूक एयरलाइन की ऑपरेशनल मैनेजमेंट टीम से हो रही है। पायलट्स की ट्रेनिंग के डिटेल और उसकी चेकिंग कंप्यूटराइज्ड है। ऐसा नहीं हो सकता कि ये किसी की नजरों में नहीं आए हों। इसलिए या तो कंप्यूटर में डेटा गलत फीड किया गया था या उसे नजरअंदाज किया गया था।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने हाल में जेट एयरवेज का ट्रेनिंग ऑडिट किया था। DGCA ने ऑडिट में पाया कि उसके 131 पायलटों का प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेट लैप्स हो चुका है, लेकिन वे उड़ान भर रहे हैं। यह सर्टिफिकेट साल में दो बार इश्यू होता है। जेट के ट्रेनिंग सेंटर के ऑडिट का ऑर्डर उस घटना के बाद दिया गया था, जिसमें मुंबई और ब्रसेल्स के बीच उड़ान के दौरान 34,000 फुट पर उड़ रहा उसका एक बोइंग 777-300 ER (एक्सटेंडेड रेंज) एकाएक 5,000 फुट नीचे आ गया था।

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