Tuesday, 21 October 2014

कोयला ब्लॉक की नीलामी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जा चुके 214 कोयला ब्लॉक्स के आवंटन में सरकारी कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी जबकि निजी कंपनियों का पूल बनाया जाएगा। इसके बाद ई-ऑक्शन के जरिए खदानें इन्हें आबंटित होंगी। केंद्र सरकार ने कोयले की उपलब्धता में आए गतिरोध को दूर करने की तैयारी शुरू कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अध्यादेश पर सहमति बनी। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बताया कि 2005 से यूपीए सरकार ने अव्यवस्था फैलाई थी। इसे नई सरकार ई-ऑक्शन के जरिए तीन से चार महीने में दूर करेगी। अध्यादेश के स्थान पर संसद के अगले सत्र में विधेयक लाया जाएगा। कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि नीलामी में सिर्फ भारतीय कंपनियों को ही भाग लेने की अनुमति होगी।

नीलामी में सरकारी कंपनियों को प्राथमिकता

> सरकारी बिजली कंपनियों जैसे एनटीपीसी और राज्यों के बिजली निगमों को खदानों के आवंटन में प्राथमिकता।
> सीमेंट, इस्पात और बिजली क्षेत्र की निजी कंपनियों के लिए पूल बनेगा। उन्हें ई-ऑक्शन के जरिए खदानें आवंटित होंगी।
> कोयला ब्लॉक्स का आवंटन वास्तविक उपभोक्ता कंपनियों को किया जाएगा। सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी।

कोर्ट ने रद्द किए थे 214 ब्लॉक्स का आवंटन

सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को 1993 से 2010 तक आवंटित 218 में से 214 का आवंटन निरस्त कर दिया था। हालांकि, इन कंपनियों को छह माह तक उत्पादन जारी रखने की अनुमति दी थी। कैग ने 2012 में एक रिपोर्ट दी थी। इसमें कहा था कि 2005 से 2009 के बीच मनमाने तरीके से कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए। इससे देश को 1.86 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

राज्यों को होगी कोयला खदानों से आय

जेटली ने बताया कि एक समिति नीलामी के लिए आधार मूल्य तय करेगी। इससे प्राप्त राजस्व संबंधित राज्यों को दिया जाएगा। कोयला भंडार छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा हैं। इन राज्यों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इन ब्लॉक्स में फंसे बैंकों का पैसा निकालने में मदद मिलेगी।

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