Wednesday, 1 October 2014

भारत की खाद्य सुरक्षा चिंताओं का समाधान निकालने की जरूरत: मोदी

विश्व व्यापार सरलीकरण के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ बातचीत में कहा कि विश्व व्यापार संगठन की बातचीत में भारत की खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान निकाला जाना चाहिए।

ओबामा से शिखर बैठक के बाद संयुक्त बयान दिये जाने के समय मोदी ने कहा, डब्ल्यूटीओ के मुद्दे पर खुलकर बात हुई। हम व्यापार सरलीकरण का समर्थन करते हैं, पर साथ ही हम चाहते हैं कि हमारी खाद्य सुरक्षा चिंताओं का समाधान होना चाहिए और हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा शीघ्र होगा। गौरतलब है कि जुलाई में जिनीवा में हुई डब्ल्यूटीओ की बैठक में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर भारत ने कड़ा रूख अपनाया था और डब्ल्यूटीओ के व्यापार सरलीकरण समझौते (टीएफए) का अनुमोदन करने से इंकार कर दिया था। इस समझौते को स्वीकार करने के लिए विकसित देश दबाव बनाये हुए हैं, हालांकि खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से भारत के सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण के मुद्दे का स्थायी समाधान किये बिना वे ऐसा दबाव बना रहे हैं।

भारत ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न की खरीदारी करने और उसे गरीबों को सस्ते दाम पर बेचने के मामले में डब्ल्यूटीओ से कृषि सब्सिडी की गणना के तौर तरीकों में संशोधन करने को कहा है। डब्ल्यूटीओ के मौजूदा नियमों में खाद्य सब्सिडी को खाद्यान्न उत्पादन के कुल मूल्य का 10 प्रतिशत पर सीमित किया गया है। इसके साथ ही सब्सिडी की गणना दो दशक पहले के मूल्य पर की जा रही है।

भारत खाद्य सब्सिडी की गणना के लिये खाद्यान्न मूल्य के आधार वर्ष 1986-88 को बदलने की मांग कर रहा है। भारत चाहता है कि सब्सिडी गणना में विभिन्न पहलुओं, जैसे मुद्रास्फीति और मुद्रा की घटबढ, को ध्यान में रखते हुये आधार वर्ष में बदलाव किया जाना चाहिये।

ऐसी आशंका है कि जैसे ही भारत अपने खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को पूरी तरह लागू करेगा सब्सिडी का आंकडा डब्ल्यूटीओ द्वारा निर्धारित 10 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो जायेगा। ऐसा होने पर डब्ल्यूटीओ का कोई सदस्य देश यदि भारत के खिलाफ शिकायत करता है तो भारत पर भारी जुर्माना लग सकता है।

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