Monday, 29 September 2014

दस्तावेज प्रमाणित करवाने से छात्रों को मुक्ति

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों को बड़ी राहत देते हुए दस्तावेजों को राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित कराने के झंझट से मुक्ति दे दी है। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को छात्रों से स्व-प्रमाणित प्रमाणपत्र ही स्वीकार करने का निर्देश दिया है। अब तक छात्रों को अंक, जन्म व अन्य जरूरी प्रमाणपत्रों की प्रति किसी राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित कराना होता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए यह प्रक्रिया काफी तकलीफदेह साबित होती है। यूजीसी के मुताबिक नई प्रक्रिया नागरिकों के लिए सुविधा वाली होगी, क्योंकि दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति या शपथपत्र बनाने में न केवल धन बल्कि समय की भी बर्बादी होती है। छात्रों को दाखिले के अंतिम चरण में मूल प्रमाणपत्र सक्षम अधिकारियों के समक्ष पेश करने होते हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजपत्रित अधिकारियों से प्रमाणित करने के बजाय स्व-प्रमाणित दस्तावेज देने का निर्देश दिया था। प्रधानमंत्री के फैसले पर अमल करते हुए विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च नियामक संस्था ने सभी कुलपतियों को इस बाबत पत्र लिखा है। इसमें कुलपतियों से शपथपत्र के प्रावधान को हटाने व स्व-प्रमाणित प्रमाणपत्र स्वीकार करने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू करने का आग्रह किया गया है। साथ ही, पत्र के जारी होने की तिथि से एक सप्ताह के अंदर अनुपालन रिपोर्ट भी भेजने को कहा गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, कई विश्वविद्यालयों में नई प्रक्रिया को अपनाया भी जा चुका है। यूजीसी के ताजा फैसले से छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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